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पश्चिम एशिया युद्ध का असर: ईंधन महंगा, उद्योगों का गणित बिगड़ा; बढ़ती लागत से एमएसएमई पर संकट

Sat, 21 Mar 2026 03:03 PM IST
Nivedita राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब)

सार

एसोसिएशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग्स के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने बताया कि एलडीओ, फर्नेस ऑयल और पेटकोक की कीमतों में करीब 20 दिनों में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसका असर फोर्जिंग सेक्टर समेत अन्य उद्योगों पर पड़ रहा है।
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Petrol Pump - फोटो : AdobeStock
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र पर साफ दिखने लगा है। कच्चे माल और शिपिंग लागत के बाद अब ईंधन की कीमतों में तेज उछाल ने उद्योगों का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत और परिवहन खर्च दोनों बढ़ गए हैं।
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लुधियाना में प्रीमियम पेट्रोल 105.30 रुपये से बढ़कर 107.28 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं औद्योगिक डीजल 87.67 रुपये से छलांग लगाकर 109.59 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। 16 मार्च को लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) भी 65.85 रुपये से बढ़कर 93.73 रुपये प्रति लीटर हो चुका है।

एमएसएमई सेक्टर पर भारी दबाव

उद्योग जगत का कहना है कि लगातार बढ़ती कीमतों से खासकर एमएसएमई सेक्टर पर भारी दबाव पड़ा है। कई इकाइयों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है। उद्यमियों ने सरकार से इस क्षेत्र को प्राथमिकता देने की मांग की है।

उत्पादन एवं परिवहन लागत बढ़ेगी

आल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संदीप जैन के अनुसार युद्ध के बाद कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है। उद्योग एलडीओ जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन उसकी कीमतें भी तेजी से बढ़ने से विकल्प सीमित हो गए हैं।

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदीश जिंदल ने डीजल की कीमतों में 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा कि इससे उत्पादन और परिवहन लागत में भारी वृद्धि होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि डीजल महंगा होने से बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

ट्रैक्टर पार्ट्स-कृषि उपकरण होंगे महंगे

एसोसिएशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग्स के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने बताया कि एलडीओ, फर्नेस ऑयल और पेटकोक की कीमतों में करीब 20 दिनों में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसका असर फोर्जिंग सेक्टर समेत अन्य उद्योगों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लागत बढ़ने से ट्रैक्टर पार्ट्स, कृषि उपकरण, साइकिल और ऑटो कंपोनेंट्स महंगे होंगे, जिसका असर आम उपभोक्ता पर भी पड़ेगा।

करनी पड़ सकती है उत्पादन में कटौती

उद्यमियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उत्पादन में कटौती, छंटनी और उद्योगों के बंद होने की स्थिति बन सकती है। सरकार से टैक्स में राहत और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने की मांग की गई है।
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