लुधियाना में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने डाक्टरों के साथ अपने दिल की बातें सांझी करते हुए कहा कि बचपन से तमन्ना थी डाक्टर बनने की। फिर वकालत में कदम रखा, लेकिन न डाक्टर बन सका और न वकील, इन चक्करों में पड़ गया। अब मैं राजनीतिक तौर पर जनता को डायग्नोज करने में माहिर बन गया।
उनका मानना है कि कुदरत बड़ी बलवान है, इंसान के हाथ केवल कर्म करना ही है। कुदरत ने व्यक्ति को जहां ले जाना है, उसे वहां पहुंचा देती है। बादल शुक्रवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हाउस में आडिटोरियरम का उद्घाटन करने के बाद डाक्टरों को संबोधित कर रहे थे।
अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए सीएम ने कहा कि लाहौर में दसवीं पास करने के बाद एफएसई में मेडिकल विषय रख लिए, लेकिन सच है कि डाक्टरी की पढ़ाई काफी मुश्किल है।
हालत यह हुई कि हम मेंढक चीरते थे और बाकी बच्चे खेलते थे। फिर मेडिकल छोड़कर आर्ट्स में दाखिला ले लिया। इसके बाद मन में आया कि वकालत की जाए। तब चंडीगढ़ नया बना था।
उस वक्त मैं देश का सबसे छोटी उम्र का विधायक बन चुका था। चंडीगढ़ में लॉ में दाखिला ले लिया, क्योंकि मुझे लगता था कि विधायक की नौकरी कच्ची है। लॉ करके अच्छी नौकरी मिल जाएगी, लेकिन तब राजनीतिक उठापटक में जेल हो गई और लॉ की पढ़ाई भी छूट गई।
उस जमाने में पीसीएस अफसर नॉमिनेट होते थे, मैं ज्ञानी करतार सिंह के पास गया और उनसे आग्रह करके पीसीएस नामिनेट हो गया।
ज्ञानी जी का मुंह मीठा कराने में लड्डू का डिब्बा लेकर उनके पास गया तो ज्ञानी जी बोले प्रकाश सिंह तुमने नौकरी नहीं करनी, कभी तुम नौकरी देने वाले बन जाओगे। इस तरह से न मैं डाक्टर बन सका, न वकील और न ही अच्छी नौकरी कर सका, इन चक्करों में पड़ गया।
बादल ने कहा कि वे देश में सबसे छोटी उम्र के विधायक बने, फिर छोटी उम्र के सीएम और अब सबसे बड़ी उम्र के सीएम हैं। सारा जीवन जनता की सेवा में लगा दिया।