केंद्रीय भू जल बोर्ड ने कहा है कि धरती के नीचे पानी के गिर रहे स्तर को बचाने के लिए उपाय न किए तो पंजाब में पानी संकट पैदा हो सकता है। बोर्ड ने खेतों, घरों में पानी के लिए बोर करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
ट्यूबवेलों से पानी का प्रयोग संयम के साथ करने की हिदायतें दी हैं। सभी डीसी को भेजी हिदायतों में कहा है कि सूबे के 142 ब्लाकों में से 75 ब्लाक डार्क जोन में हैं। अब जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी के बगैर बोर करने वालों खिलाफ पर्यावरण और प्रदूषण एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज होगा।
खेती माहिर स्टेट अवार्डी डॉ. जसविन्दर सिंह बराड़ ने कहा कि मोगा के 5 ब्लाकों में से मोगा-1, मोगा-2 और नेहाल सिंह वाला पहले ही डार्क जोन में हैं।
अथारिटी ने स्पष्ट किया कि बाकी दो ब्लाक बाघापुराना और कोट इसे खा भी खतरे के निशान पर हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के 143 ब्लाकों में से 75 ब्लाक डार्क जोन में डाले जा चुके हैं। जालंधर जिले के सभी नौ ब्लाक का पानी पीने लायक नहीं रहा है। प्रदेश के 28 ब्लाक खतरे में हैं।
कृषि विभाग को कैंप आयोजित करके किसानों को पानी का सही उपयोग करने के लिए जागरूक करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि खेतों के अलावा घरों में भी पानी के लिए बोर करने को मनाही रहेगी।
डॉ. बराड़ ने कहा कि पानी का सही प्रयोग समय की मुख्य जरूरत है। किसानों को नई तकनीकों के साथ कम पानी लेने वाली फसलों बीजने के लिए प्रेरित किया।
बेड के साथ बिजाई में फायदा
उन्होंने बताया कि गेहूं में स्तरीय बिजाई के लिए 7.5 सेंटीमीटर और बेड के साथ बिजाई के लिए केवल 5 सेंटीमीटर सिंचाई की जरूरत है। बेड बना कर गेहूं की बिजाई करन के साथ 4 प्रतिशत झाड़ के वृद्धि और पानी की 35 प्रतिशत बचत होती है। बेडों पर बीजी गेहूं से घास पातों की समस्या भी कम होती है और रासायनिक खादों का प्रयोग भी सही होता है।