देश के पहले बीस स्मार्ट सिटी की सूची में शुमार लुधियाना को वाकई में स्मार्ट बनाने के लिए बुड्ढे नाले का कायाकल्प होना जरूरी है। बुड्ढे नाले की मौजूदगी के साथ शहर को स्मार्ट और स्वच्छ बनाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। सूबे की हर सरकार और केंद्र सरकारों ने इस नाले की दशा सुधारने के लिए करोड़ों रुपये की ग्रांट दी है, बावजूद इसके नाले की स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालत यह है कि नाले के आसपास रह रही लाखों की आबादी ही नहीं, बल्कि पशु भी बीमार हो रहे हैं।
1960 में बुड्ढे नाले का पानी साफ था और इसमें 56 तरह की मछलियां पाई जाती थी, लेकिन औद्योगिकीकरण, सीवरेज, डेयरी और निगम का गंदा पानी गिरने से यह नाला बुरी तरह प्रदूषित हो गया। यह नाला जहां लोगों को बीमारियां परोस रहा है, वहीं सतलुज नदी को भी गंदा कर रहा है। इसके पानी में भारी मेटल, टॉक्सिक, लेड और कई तरह के खतरनाक केमिकल पाए गए हैं। शहर के बीचों बीच करीब 14 किलोमीटर से गुजर रहे इस नाले के आसपास लाखों लोग रहते हैं। बरसात के दिनों में नाले का पानी ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों में घुस जाता है।
गुरु अंगद देव वेटरिनरी साइंस विश्वविद्यालय (गडवासू) के वेटरिनरी साइंस कालेज ने बुड्ढे नाले के आसपास 63 गायों के रक्त सैंपल लेकर एक स्टडी कराई है। इसके काफी खतरनाक नतीजे सामने आए हैं। पशुओं के रक्त सैंपल में लेड, कैल्शियम, निकल समेत कई तरह के हैवी मेटल पाए गए हैं। गडवासू की वरिष्ठ माहिर डॉ. सुषमा छाबड़ा का कहना है कि इन मेटल के कारण पशुओं की सेहत पर असर देखा गया।
इन पशुओं का हैवी मेटल युक्त दूध पीकर मानव भी बीमारियों से ग्रस्त हो सकता है। बुड्ढे नाले के अंतिम छोर नूरपुर बेट के आसपास के इलाकों में पशुओं से लिए सैंपल में लेड की मात्रा 0.87 पार्ट्स पर मिलियन (पीपीएम) पाई गई। जबकि निकल की मात्रा 0.076 पीपीएम, आरसैनिक की 0.27 पीपीएम और कैडमियम की 0.29 पीपीएम पाई गई। यह सामान्य से काफी ज्यादा है। गडवासू के माहिरों ने भी इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है।
2009 से अब तक एक अरब की ग्रांट
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी अपने कार्यकाल के दौरान बुड्ढे नाले की दशा सुधारने को लेकर काफी प्रयास किए। 2009 में सफाई के लिए केंद्र से 50 करोड़ रुपये की ग्रांट आई। इसके बाद बायो रेमिडेशन प्रोजेक्ट के तहत 16 करोड़ की ग्रांट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से आई। मार्च 2014 में नाले की सफाई के लिए फिर 37.5 करोड़ रुपये की ग्रांट आई। इसके बावजूद नाले की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।
पूर्व मंत्री मनीष तिवारी का कहना है कि केंद्र से करोड़ों की ग्रांट आने के बावजूद भी नाले का कोई सुधार नहीं हुआ है। कुछ माह पहले पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने भी शहर के ट्रीटमेंट प्लांट समेत नाले का भी दौरा किया था और उन्होंने नाले के कारण गंदी हो रही सतलुज नदी की स्थिति पर भी चिंता जताई थी।