लुधियाना में प्रदर्शन करते अभिभावकों को समाझाते पुलिसकर्मी
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ग्रीन लैंड स्कूल 32 सेक्टर की ओर से हाईकोर्ट और डिप्टी कमिश्नर के आदेशों का पालन न करने के विरोेध में 150 अभिभावकों ने बच्चों के साथ करीब एक घंटे तक रोड जाम कर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंची पुलिस के आश्वासन पर पेरेंट्स ने धरना उठाया।
रमन शर्मा, अनिल शर्मा, अमित कुमार ने बताया कि पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से प्राइवेट स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन जारी है। इसके तहत हाईकोर्ट और डिप्टी कमिश्नर ने भी आदेश जारी किए हैं कि प्राइवेट स्कूलों की ओर से रि-एडमिशन, बुक्स, हर साल यूनिफार्म आदि नहीं ले सकते। इसके बावजूद भी पेरेंट्स से पैसे लिए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पहली कक्षा के बच्चों की किताबें चार हजार रुपये में दी जा रही हैं, जो एनसीआरटी की नहीं बल्कि प्राइवेट पब्लिशर की हैं। इसे स्कूल के पास ही घर में बेचा जा रहा है। इसके अलावा रि-एडमिशन के 6 से आठ हजार तक चार्ज भी ले रहे हैं और उसकी रसीद भी नहीं दी जा रही। स्टाफ का कहना है कि रि-एडमिशन के बिना एडमिशन नहीं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि हर साल स्कूल की ओर से बच्चों की ड्रेस भी चेंज कर दी जाती है।
इस बारे में जब प्रिंसिपल से बात करनी चाहिए तो उन्होंने बात करने से साफ इंकार कर दिया। इसी कारण पेरेंट्स को चंडीगढ़ रोड जाम करना पड़ा। पेरेंट्स के साथ बच्चों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। करीब एक घंटे तक प्रदर्शन से गाड़ियों की लंबी लाइनें लग गई। मौके पर पहुंची डिवीजन नंबर सात की पुलिस ने आश्वासन देकर पेरेंट्स को वहां से उठाया और प्रिंसिपल से मिलवाने ले गए। स्कूल पहुंचनेे पर प्रिंसिपल विनिता सन्न ने पेरेंट्स से मिलने सेे मना कर दिया।
पेरेंट्स ने रिसेप्शन पर ही धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद चार पेरेंट्स को प्रिंसिपल से मिलने दिया गया। प्रिंसिपल ने सोमवार का समय मांगा और समस्या का हल करने का आश्वासन दिया। ग्रीन लैंड स्कूल के चेेयरमैन रजेश रुद्रा ने बताया कि सॉफ्टवेयर अपडेट होने गए थे, इसलिए रसीद नहीं दे रहे थे। स्कूल की ओर से रि-एडमिशन नहीं बल्कि डेवलपमेंट चार्ज लिए जा रहे हैं। जो कोर्ट के मुताबिक स्कूल ले सकता है।