कैसी है पाठशाला...
-लुधियाना के फील्डगंज के प्राइमरी स्कूल के बच्चों को शिफ्ट करने के बाद भी नहीं मिला कमरा
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विकास मल्होत्रा
लुधियाना। शिक्षा क्रांति के दावों के बावजूद पंजाब में स्कूलों की हालात कोई ज्यादा अच्छी नहीं है। लुधियाना में कई ऐसे स्कूल हैं जिनकी हालत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। कहीं स्कूल की इमारत ही नहीं है तो कहीं बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट किया गया है। बच्चों को जहां शिफ्ट किया गया है, वहां भी वे बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। सर्दी हो या गर्मी हर मौसम में बच्चों को इसी बरामदे में पढ़ना पढ़ता है।
बच्चों को जिस स्कूल में शिफ्ट किया गया है, उस बिल्डिंग की भी हालत अच्छी नहीं है। पुरानी होने के कारण वहां भी तीसरी मंजिल का निर्माण नहीं किया जा सकता। फील्डगंज एरिया के कूचा नंबर 16 का प्राइमरी स्कूल काफी पुराना है लेकिन वर्तमान में इसकी इमारत खाली प्लाट व खंडहर में बदल चुकी है।
फील्डगंज कूचा नंबर 16 जंज घर के साथ प्राइमरी स्कूल में काफी बच्चे पढ़ते थे लेकिन सरकारों ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे स्कूल कंडम होता गया। स्कूल की प्राॅपर्टी को लेकर विवाद हो गया था जिस कारण इसका निर्माण नहीं हो सका। अब इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
पहले खुले में पढ़ते थे, बारिश आने पर घर भेजना पड़ता था
स्कूल की छत नहीं रही तो बच्चे पहले खुली हवा में पढ़ते थे लेकिन जब कभी बारिश आती तो बच्चों को घर भेजना पड़ता था। बाद में 80 बच्चों को पास के गुरुद्वारा साहिब में शिफ्ट किया गया और फिर शाहपुर रोड स्थित हाई स्कूल की इमारत में शिफ्ट कर दिया। जिस हाई स्कूल की इमारत में बच्चों को शिफ्ट किया गया है, वहां अतिरिक्त कमरे नहीं थे तो बच्चों को बरामदे में बैठा दिया गया। अब 80 बच्चे स्कूल के बरामदे में बैठकर पढ़ रहे हैं। गर्मी हो या सर्दी बच्चों को यहीं बैठना पड़ता है।
प्राइमरी स्कूल के शिक्षक ने बताया कि आजादी से भी पहले से स्कूल इसी इमारत में चल रहा था। उसके मालिकाना हक को लेकर विवाद था। मामला हाईकोर्ट में होने के कारण इसकी मरम्मत नहीं करवाई जा सकती थी। पहले स्कूल को नजदीक के गुरुद्वारा साहिब में शिफ्ट किया गया था और छह साल से बच्चों की कक्षाएं शाहपुर रोड के हाई स्कूल की इमारत में चल रही हैं। यह इमारत भी पांच दशक पुरानी है। दो मंजिला इमारत में नीचे दो प्राइमरी स्कूल और पहली मंजिल पर हाई स्कूल चल रहा है। इस इमारत में पहले ही स्टाफ रूम, लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब की कमी थी और यहां पर प्राइमरी स्कूल के बच्चे शिफ्ट करने से संकट बढ़ गया है।
मुख्य अध्यापक बोले- नीचे बैठकर पढ़ रहे बच्चे
हाई स्कूल के मुख्य अध्यापक रूपिंदर सिंह का कहना है कि हमारे स्कूल की बिल्डिंग भी काफी पुरानी है। इस पर तीसरी मंजिल डालना मुश्किल है। इस वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल के पास पहले ही कमरों की कमी है और ऊपर से प्राइमरी स्कूल के बच्चों को इधर शिफ्ट किया गया है। इससे सभी बच्चों और स्टाफ को परेशानी हो रही है। बच्चे नीचे बैठ कर पढ़ने को मजबूर हैं।