सुनाम ऊधम सिंह वाला। शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा ने पहली बार अकेले दम पर जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों में पूरी ताकत झोंकी है। संगरूर जैसे किसान बहुल इलाके के गांवों में भाजपा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उसे कहीं भी प्रत्यक्ष विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। यह स्थिति पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मुकाबले बदलाव का संकेत देती है, जब पार्टी को तीखा किसान विरोध झेलना पड़ा था।
भाजपा की जिला अध्यक्ष दामन बाजवा इस शांतिपूर्ण समर्थन को भविष्य की ग्रामीण राजनीति के लिए सकारात्मक कदम मान रही हैं। मतदान के दिन कमल का चिन्ह ग्रामीण मतदाताओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा। कई बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर और मुखौटे पहने समर्थक मतदाताओं में उत्साह भरते हुए नजर आए।
ग्रामीण वोट बैंक पर नजर
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या भाजपा अकेले दम पर भविष्य में ग्रामीण वोट बैंक में सेंध लगा पाएगी। रविवार को मतदान के दिन दामन बाजवा ने अपने पैतृक गांव अकालगढ़ और चट्ठे नकटे के बूथों पर पहुंचकर मतदान किया। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। दामन बाजवा ने कहा कि भाजपा को शांतिपूर्वक तरीके से मतदान प्रक्रिया में शामिल होने देना ग्रामीण राजनीति में बदलाव का संकेत है। हालांकि, भाजपा को शांतिपूर्वक ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश करना एक बड़ी राहत है, लेकिन यह जानने के लिए कि मतदाताओं ने कितनी बार भाजपा पर भरोसा जताया है, चुनाव परिणामों का इंतजार करना होगा।