:::विजय दिवस पर विशेष::
-पाकिस्तान को घुटनों पर लाने में निभाई थी अहम भूमिका
कंवरपाल
हलवारा।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एयर फोर्स स्टेशन हलवारा बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ था। भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था। एयर फोर्स स्टेशन हलवारा सामरिक दृष्टि से यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण है। हलवारा और इससे जुड़े वायुसेना केंद्र ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अत्यंत सक्रिय रूप से भाग लिया था। युद्ध के दौरान हलवारा वायुसेना का एक प्रमुख हवाई अड्डा बना जिससे कई जंगी विमानों ने पाकिस्तान पर हमले किए।
जब युद्ध का आगाज हुआ और पाकिस्तान ने 3 दिसंबर 1971 को भारतीय पश्चिमी मोर्चे पर हमला किया तो उसने हलवारा को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाया। पाकिस्तानी वायुसेना ने हलवारा को निशाना बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों ने उन्हें करारा जवाब दिया। भारतीय विमानों ने पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया और उनके पैराग्लाइडर कमांडोज को या तो नष्ट कर दिया या पकड़ लिया गया।
14 दिसंबर को ढाका पर बमबारी
14 दिसंबर 1971 को भारतीय वायुसेना ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के ढाका स्थित गवर्नर हाउस पर मिग-21 और हंटर लड़ाकू विमानों से जोरदार बमबारी की। इस हमले ने पाकिस्तान की सेना को भारी झटका दिया और उनके रणनीतिक केंद्रों को नष्ट कर दिया। उस समय पाकिस्तान के राज्यपाल और सेना के वरिष्ठ अधिकारी एक बंद कमरे में बैठक कर रहे थे, और भारतीय हमले ने उनकी योजना को बुरी तरह से प्रभावित किया।
हमले में भारतीय पायलटों की वीरता
इस युद्ध में भारतीय वायुसेना के कई पायलट शहीद हुए जिनमें फ्लाइट लेफ्टिनेंट निर्मल जीत सिंह सेखों (परम वीर चक्र) और फ्लाइट लेफ्टिनेंट विजय वसंत तांबे जैसे शहीदों के उल्लेखनीय उदाहरण शामिल हैं। इन जांबाजों ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा में अपने सर्वोच्च बलिदान दिए। विजय दिवस (16 दिसंबर) भारतीय सशस्त्र बलों की सबसे निर्णायक और ऐतिहासिक विजयों में से एक की याद दिलाता है। इस दिन भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना द्वारा दिखाई गई साहसिकता, बलिदान को सम्मानित किया जाता है। 1971 का युद्ध दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को बदलने वाला था क्योंकि इस युद्ध ने बांग्लादेश को स्वतंत्रता दिलाई और पाकिस्तान को उसकी सीमाओं तक सीमित कर दिया।
13 दिन चला युद्ध
1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध 13 दिन चला और 16 दिसंबर को पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप पाकिस्तान के लगभग 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाल दिए, जिससे बांग्लादेश की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह युद्ध न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रतीक बना, बल्कि दुनिया भर में भारतीय सशस्त्र बलों की प्रतिष्ठा को भी बढ़ाया। 1971 के युद्ध ने यह साबित किया कि हलवारा एयरफोर्स स्टेशन का सामरिक महत्व इस युद्ध में अनमोल था और इसकी भूमिका ने पाकिस्तान को धूल चटा दी। विजय दिवस के अवसर पर हम उन शहीदों और वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता और सुरक्षा की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। संवाद