शहर के सभी प्रिंटर्स ने शनिवार को महंगे हो रहे कागज के विरोध में एक दिन की हड़ताल की। प्रिंटर्स ने दुकानें और औद्योगिक इकाईयां बंद रखकर अपना विरोध जताया।
एक दिन की हड़ताल से इस उद्योग को करीब पांच करोड़ रुपये का झटका लगा है। उद्यमियों ने साफ किया है कि यदि कागज की कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया, मिलों की मनमानियों पर अंकुश न लगाया गया तो प्रिंटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
पिछले दो तीन माह से कागज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। क्राफ्ट पेपर 25 रुपये से उछल कर तीस रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। इसी तरह बोर्ड और हर तरह का कागज महंगा हो रहा है। ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन के महासचिव कमल चोपड़ा का कहना है कि उद्यमियों के पास दो तीन माह का एडवांस आर्डर रहता है।
कच्चे माल की कीमतों में बार-बार वृद्धि होने से प्रिंटर्स को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा चीन से आ रहा सस्ता आयात भी कारोबार को प्रभावित कर रहा है। चोपड़ा ने कहा कि कागज आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आता है। इसलिए सरकार का फर्ज है कि वह कीमतों को चेक करे। एसोसिएशन की मांग है कि कीमतें बढ़ाने से तीन माह पहले सूचित किया जाए।
रेपर पर कागज की तमाम बारीकियां और रेट अंकित किया जाए। प्रिंटिंग इंडस्ट्री में जान फूंकने को सरकार सब्सिडी दे। कागज और पेपरबोर्ड पर आयात शुल्क खत्म किया जाए, ताकि इंडस्ट्री को सस्ता विदेशी कच्चा माल मिल सके। इस अवसर पर प्रधान परवीन अग्रवाल समेत कई उद्यमी एवं कारोबारी मौजूद रहे।