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कैबिनेट मंत्री आशु के खिलाफ आजाद चुनाव लड़ेंगे सीनियर कांग्रेसी नेता बावा

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लुधियाना। जैसे जैसे कांग्रेस की लिस्ट जारी हुई वैसे ही कांग्रेस का अंदरूनी कलेश खुलकर उजागर होने लगा है। टकसाली कांग्रेसी और पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डवेलपमेंट कार्पोरेशन के चेयरमैन केके बावा ने भी अब विरोध शुरू कर दिया है। केके बावा पिछले 40 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हैं और आत्म नगर हलके के साथ-साथ साउथ हलके से टिकट की मांग कर रहे थे। आत्म नगर से कांग्रेस ने पहली लिस्ट में ही यहां से 2017 का चुनाव हार चुके कमलजीत सिंह कड़वल पर दोबारा दांव खेला है। उसके बाद उम्मीद थी कि बावा को साउथ हलके से टिकट दिया जा सकता है, लेकिन देर रात को साउथ हलके से पार्टी ने ईश्वर जोत चीमा को टिकट जारी कर दिया जो कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु के काफी करीबी माने जाते हैं। जिसके बाद बावा ने खुलकर विरोध कर दिया और सोमवार को एलान कर दिया कि वह आशु के खिलाफ ही वेस्ट हलके से आजाद चुनाव लड़ेंगे।
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सीनियर कांग्रेस नेता केके बावा ने कहा कि पार्टी में वह काफी समय से सेवा कर रहे हैं। मगर इस बार कांग्रेस कुछ अलग ही नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार टिकट वितरण में काफी अनदेखी की गई है। पार्टी को एक कंपनी बना दिया गया है और जो जैसा चाह रहा है वैसा कर रहा है। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के खिलाफ नहीं है। बल्कि कांग्रेस को अलविदा भी नहीं कहेंगे, लेकिन वेस्ट हलके से कैबिनेट मंत्री आशु के खिलाफ आजाद लड़ेंगे। वह अपना नामांकन मंगलवार को करेंगे। भारत भूषण आशु के खिलाफ इस बार उनके नजदीकी साथी ही विरोध करने में जुटे है। पहले तरुण जैन बावा और सबसे नजदीकी साथी गुरप्रीत गोगी भी आप में शामिल होकर उनके खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले भी कई नेता कांग्रेस से बागी हो चुके हैं।
बगावत करने वाले वह पांचवें नेता
केके बावा कांग्रेस में बगावत करने वाले बावा पांचवें नेता हो गए हैं। इससे पहले साहनेवाल से सतविंदर कौर बिट्टी, समराला से अमरीक सिंह ढिल्लों, जगरांव से मलकीत सिंह दाखा, पूर्व विधायक जसबीर सिंह जस्सी खंगूड़ा और अब के के बावा ने विरोध किया है। अमरीक सिंह ढिल्लों ने आजाद चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं, जबकि जस्सी खंगूड़ा पार्टी छोड़ चुके हैं। पार्टी छोड़ चुके जसबीर सिंह जस्सी खंगूड़ा का कहना है कि अब पार्टी में रहनुमाई करने वाला कोई नहीं रहा है। हर नेता वर्चस्व बचाने में लगा है। जिस कारण निचले स्तर के नेता और कार्यकर्ता पूरी तरह से परेशान और नाराज हैं।
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