सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने साइकिल पर दस रिफ्लेक्टर लगाने की समय सीमा को दो माह बढ़ाकर एक सितंबर तक कर दिया है, लेकिन साइकिल उद्योग नाखुश है। उद्यमियों का तर्क है कि देश में कमेटी के मानकों के अनुरूप रिफ्लेक्टर विकसित करने के लिए कम से कम नौ माह का वक्त दिया जाए।
दो माह में रिफ्लेक्टर न पूरी मात्रा में आयात किए जा सकते हैं और न ही डेवलप। इस संबंध में यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन शीघ्र ही कमेटी को ज्ञापन देगी।
काबिलेजिक्र है कि रोड सेफ्टी कमेटी ने अप्रैल में नोटिस जारी करके एक जुलाई से आईएसओ मानकों के तहत प्रति साइकिल दस रिफ्लेक्टर लगाने का आदेश दिया था। इसका मकसद सड़क पर साइकिल दुर्घटनाओं को कम करना था, लेकिन कमेटी द्वारा निर्धारित मानकों के तहत रिफ्लेक्टर केवल चीन और ताईवान में ही बन रहे हैं। वहां से इतनी जल्दी आयात करना संभव नहीं था।
यूसीपीएमए के प्रधान चरणजीत सिंह विश्वकर्मा का कहना है कि दो माह के वक्त में भी तकनीक विकसित नहीं की जा सकती। इसके लिए कम से कम नौ माह का वक्त चाहिए। कमेटी को इस बाबत लिखा जा रहा है।
साइकिल निर्माताओं के संगठन जी-13 फोरम के प्रवक्ता यूके नारंग का कहना है कि सरकार का ध्यान लोकल इंडस्ट्री को बूस्ट करने पर नहीं है। उनका कहना है कि इससे मेक इन इंडिया मुहिम धूमिल होगी। देश में रिफ्लेक्टर की तकनीक विकसित करने के लिए उचित वक्त देना होगा। उनका कहना है कि आयात पर निर्भरता मैन्यूफैक्चरिंग बेस को कमजोर करती है।