-न नक्शा सार्वजनिक, न सूचियां बोर्ड पर एतराज कैसे करें लोग
-
अतुल शर्मा
जगरांव। नगर काउंसिल चुनाव से पहले जगरांव में वार्डबंदी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि नई वार्डबंदी का नोटिफिकेशन 18 दिसंबर 2025 को जारी किया गया, जबकि 19 दिसंबर को वार्डों की सूची वायरल हो गई। इसके बाद मात्र सात दिनों के भीतर एतराज आमंत्रित कर लिए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एतराज की अंतिम तारीख नजदीक होने के बावजूद नगर कौंसिल कार्यालय में न तो वार्डों का नक्शा सार्वजनिक किया गया और न ही सूचियां नोटिस बोर्ड पर लगाई गईं।
ऐसे में आम लोग और संभावित उम्मीदवार यह जानने में असमर्थ हैं कि उनका मोहल्ला, गली या इलाका किस वार्ड में शामिल किया गया है। नगर काउंसिल पहुंचे कई नागरिकों ने बताया कि वे सिर्फ अपना एरिया जानने आए थे, लेकिन न कोई नक्शा मिला और न ही अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी दी गई। लोगों का आरोप है कि जानबूझकर नक्शा सार्वजनिक नहीं किया जा रहा, ताकि विपक्षी दलों के उम्मीदवार भ्रम में रहें और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को सीधा लाभ मिले।
पूर्व नगर कौंसिल प्रधान जतिंदरपाल राणा और पूर्व सीनियर वाइस प्रधान दविंदरजीत सिद्धू ने भी इस पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जब एतराज की आखिरी तारीख एकदम करीब है और अब तक नक्शा नहीं लगाया गया, तो इसे निष्पक्ष प्रक्रिया कैसे कहा जा सकता है। पारदर्शी वार्डबंदी ही निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद होती है।
राजनीतिक दबाव में नक्शा रोकने का आरोप
पार्षद जरनैल सिंह लोहट, पार्षद अमन कपूर सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में वार्डबंदी का नक्शा जानबूझकर रोका गया है। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि चुनाव को प्रभावित करने की सोची-समझी कोशिश प्रतीत होती है। नगर काउंसिल की सूची के अनुसार कुल 23 वार्ड बनाए गए हैं। इनमें 11 वार्ड महिलाओं के लिए, आठ जनरल, तीन अनुसूचित जाति महिला और एक वार्ड पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। वार्डों के आरक्षण की जानकारी सामने है, लेकिन जब तक क्षेत्रवार नक्शा सार्वजनिक नहीं होगा, तब तक लोगों का भ्रम और नाराजगी दूर होना मुश्किल है। संवाद