पंजाब में सूबा सरकार द्वारा डीजल एवं पेट्रोल पर लगे एक रुपये प्रति लीटर
इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (आईडी) फीस वापस लेने की मांग को लेकर 28 से 30
मई तक दी नो परचेज की कॉल वापस ले ली गई है।
पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स
एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट जेपी खन्ना ने इसकी पुष्टि की है। खन्ना का
तर्क है कि सूबे में ऑयल कंपनियों के पास पेट्रो उत्पादों का स्टॉक खत्म हो
गया है। ऐसे में पेट्रोल पंप मालिकों को पेट्रोल एवं डीजल का स्टॉक नहीं
मिल रहा है। नो परचेज के दौरान ग्राहकों को दिक्कतें आ सकती हैं, इसी को
देखते हुए फिलहाल इस कॉल को वापस लिया गया है।
खन्ना का तर्क है कि पंजाब में पहले ही पेट्रोल पर
30.80 फीसदी वैट, इस पर दस फीसदी सरचार्ज और कुल दो रुपये (एक रुपया पहले
और एक रुपया अब) प्रति लीटर आईडी सेस लगा है। ऐसे में पेट्रोल पर राज्य का
कुल टैक्स 34.50 फीसदी बनता है। नतीजतन पंजाब में देश का सबसे महंगा
पेट्रोल है।
इसके अलावा डीजल पर भी 12.50 फीसदी वैट और सरचार्ज के बाद एक
रुपये फीस लगने से यह चंडीगढ़ एवं हरियाणा के मुकाबले ढाई रुपये प्रति लीटर
महंगा हो गया है। महंगे पेट्रो उत्पादों के कारण पंजाब में बिक्री 25
फीसदी तक कम हो सकती है।
खन्ना
ने दावा किया है कि महंगे पेट्रो उत्पादों के कारण सीमावर्ती जिलों के
करीब 500 पेट्रोल पंपों पर बिक्री पचास फीसदी से अधिक कम हो गई है। कई पंप
बंदी के कगार पर आ गए हैं। आईडी फीस लगाते वक्त भी पेट्रोल डीलरों से सलाह
नहीं की गई। सूबे में 55 फीसदी डीजल ट्रांसपोर्टर इस्तेमाल करते हैं। जबकि
25 फीसदी कृषि, 7 फीसदी इंडस्ट्री एवं 18 फीसदी जनता उपयोग करती है।