बठिंडा में प्रदर्शन करते रमसा अध्यापक
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एसएसए रमसा अध्यापक यूनियन ने रविवार को दाना मंडी में प्रदेश सरकार के खिलाफ राज्य स्तरीय रोष रैली की। इसमें प्रदेश भर से सैकड़ों रमसा अध्यापकों व लैब अटेंडेंटों और हेड मास्टरों ने शिरकत की।
यूनियन के प्रदेश जनरल सचिव अरजिंदर कलेर ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और सेंटर स्पांसर्ड स्कीम के तहत भर्ती करीब 12 हजार अध्यापक, हेड मास्टर और लैब अटेंडेंट बीते आठ सालों से लगातार प्रदेश सरकार की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। सरकार नियमों के तहत भर्ती होने के बावजूद समूह अध्यापकों, हेड मास्टरों व लैब अटेंडेंट को रेगुलर करने के लिए टालमटोल कर रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में तीन सालों के बाद रेगुलर करने की नीति होने के बावजूद उनको 8 सालों से रेगुलर नहीं किया जा रहा। अध्यापक नेता राजविंदर और सुखदीप ने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी ऐसे काम के लिए ठेकेदारी की मनाही है, जहां पर पूरा साल काम चलना हो, लेकिन पंजाब सरकार ऐसे कानून के विपरीत जाकर शिक्षा और सेहत विभाग ठेकेदारी सिस्टम के तहत चला रही है।
उन्होंने बताया कि अध्यापकों को बीते चार माह, हेड मास्टरों को बीते पांच माह और लैब अटेंडेंटों को बीते 13 माह से प्रदेश सरकार ने वेतन नहीं दिया। इसके चलते प्रदेश सरकार उनका अर्थिक तौर पर भी शोषण कर रही है। जिला मैजिस्ट्रेट हरकीरत सिंह ने मौके पर पहुंच कर अध्यापकों से मांग पत्र लिया। साथ ही आश्वासन दिलाया कि 25 मई से पहले उनकी मुख्यमंत्री प्र्रकाश सिंह बादल के साथ पैनल बैैठक करवा दी जाएगी। इसके बाद अध्यापकों ने अपनी रोष रैली को समाप्त कर दी।