डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के पास सोमवार को किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। बाद में किसानों ने डिप्टी कमिश्नर को एक मांग पत्र सौंपा। इस दौरान किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर अपनी भड़ास निकाली।
धरने को संबोधन करते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने मांग की कि केंद्र व राज्य सरकार किसानों की आत्महत्याएं रोकने के लिए कदम उठाएं। साथ ही कहा कुदरती आपदाओं से खराब होने वाली फसल पूरा मुआवजा और खुदकुशी कर चुके किसानों के परिवारों को तीन लाख रुपए सहायता राशि और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देकर कर्जा माफ किया जाए । उन्होंने मांग की कि कृषि लागत खर्चों में 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर सभी फसलों के सरकारी रेट और सरकारी खरीद गारंटी की जाए। इस के अलावा किसानों को पहल के आधार पर ट्यूबवेल के कनेक्शन दिए जाएं।
भारतीय किसान यूनियन के सीनियर मीत अध्यक्ष मोठू सिंह कोटडा ने कहा कि 10 वर्ष पहले किसान मजदूर जत्थेबंदिय ने किसान पक्षीय कर्ज कानून बनाने के लिए पंजाब सरकार को बिल का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। सरकार किसानों के संघर्ष के दबाव में आकर किसान कर्ज बिल 2016 लाई है, जो किसानों के प्रस्ताव मुताबिक नही है। उन्होंने कहा अधिकारी अपने चहेतों को ही फसल खराब का मुआवजा दे रहे हैं। पीड़ित किसानों को अभी तक मुआवजा राशि नहीं मिली है।