पंजाब के पूर्व डीजीपी जेल शशिकांत ने आरोप लगाया है कि राज्य में बड़े स्तर पर नशे के खिलाफ मुहिम चलाने वाले पुलिस के पचास फीसदी छोटे बड़े अधिकारी ही नशेड़ी है। मुहिम को बढ़ावा देने वाली राज्य सरकार के कई नेता और मंत्री में नशे की गिरफ्त में हैं। जो हेरोइन, अफीम और स्मैक जैसे खतरनाक नशा करने के आदी हैं।
उन्होंने कहा कि अगर किसी को उनकी बात पर कोई शक है तो पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं का डोप टेस्ट करवा कर देख लें। हाईकोर्ट में चल रहे नशे के खिलाफ केस के लिए वह मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को गवाह जरूर बनाएंगे। शशिकांत वीरवार को करीब दो सप्ताह पहले संदिग्ध हालात में गाड़ी से मृत मिले अभिषेक के परिजनों से मिलने के लिए आए थे।
उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 2007 में उनकी तरफ से दी गई फाइल पर एक्शन लिया गया होता तो पंजाब की नौजवान पीढ़ी को ऐसे दिन न देखने पड़ते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बादल ने उस समय अपने कुछ मंत्रियों को भी इस धंधे के लिए डांट फटकार भी लगाई थी।
शशिकांत ने दावा किया कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त पर जाकर कहें कि वह फाइल उन्होंने नहीं ली। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जेलों में रोजाना दस किलो हेरोइन की खपत होती रही है। वह हेरोइन किसी ओर की नहीं बल्कि अकाली दल के मंत्रियों की सप्लाई होती थी। इसको रोकने के लिए लुधियाना के पूर्व मंत्री ने उन्हें बुलाकर धमकियां भी दी थी।
हाईकोर्ट में चल रहे नशे के खिलाफ केस के लिए वह मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को गवाह जरूर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव तो राज्य सरकार के लिए एक ट्रेलर था। 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल पंजाब से पूरी तरह खत्म हो जाएगा।