लुधियाना में गौहर नाटक का मंचन करते कलाकार।
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गुरु नानक देव भवन में लुधियाना सांस्कृतिक समागम द्वारा ‘गौहर’ नाटक का मंचन किया गया। जिसका निर्देशन प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेत्री लिलिट दुबे ने किया। प्ले में युवा गौहर का किरदार बॉलीवुड अभिनेत्री और गायिका राजेश्वरी सचदेव ने किया। जबकि गौहर के बदलाव के बाद की जिंदगी का किरदार जीला खान ने निभाया। इसके अलावा प्रख्यात थिएटर आर्टिस्ट डैंजिल, अनुज, परिनाज आदि कलाकारों ने विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। प्ले के ‘हम तो मरकर भी किताबों में रहेंगे जिंदा...गम उन्हीं का है जो मर जाने के बाद गुजर जाते हैं..’ डायलॉग पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई।
यह प्ले लगभग 100 साल पहले की एक भारतीय गायिका की जिंदगी पर आधारित था। इस गायिका ने सबसे पहले ग्रामोफोन पर गाया। अभिनेत्री राजेश्वरी ने बताया कि इस कहानी से पता चलता है कि 100 वर्ष पहले गौहर ने किस तरह अपनी कला के लिए मेहनत की। उस औरत में बहुत पैशन था और उसके अपने ही सुर थे। उन्होंने 20 भाषाओं में 600 गीत गाए। वह 15 वर्ष की आयु में गाने लगी थी।
छह वर्ष की आयु में उसके पिता उसे छोड़कर चले जाते हैं, जिसे ढूंढते हुए एक यूरोपियन इंजीनियर यहां आता है और उसे रिकॉर्ड करता है। कहानी में गौहर जिंदगी में प्यार को विभिन्न रिश्तों में ढूंढती गई। मंचन से पहले आयोजित पत्रकार सम्मेलन के दौरान लिलिट दुबे ने बताया कि यह कहानी ‘माई नेम इज गौहर खान’ किताब पर आधारित है। यह किताब विक्रम सामंत ने छह साल की रिसर्च से लिखी थी।
थिएटर को सरकारी सपोर्ट मिले : लिलिट
बॉलीवुड और क्रिकेट के जादू के चलते थिएटर काफी पीछे रह गया है। जिस कारण हम अपने प्ले वर्ल्ड मैप पर ले जाने में असमर्थ हैं। इस बारे में लिलिट दूबे ने कहा कि थिएटर को कोई सरकारी सपोर्ट नहीं मिल रहा। इस प्रोफेशन को पूरी रिस्पेक्ट नहीं दी जा रही है। बॉलीवुड और क्रिकेट के चलते बिना सपोर्ट के युवा थिएटर को नहीं जान पा रहे। हमारे युवाओं के लिए ये असल कल्चर है और अभिभावकों को भी चाहिए कि वह बच्चों को शुरू से ही अपने कल्चर से जोड़ें।