फ्यूल के डिजिटल भुगतान पर संकट गहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। पंजाब में जल्द ही पेट्रोल और डीजल के लिए दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई डिजिटल भुगतान रुक सकते हैं। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन पंजाब (पीपीडीएपी) ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क का विरोध किया है। एसोसिएशन ने इसके विरोध में यह कदम उठाने की चेतावनी दी है।
डीलरों का कहना है कि यह अतिरिक्त शुल्क उनकी वित्तीय स्थिति को और खराब कर देगा। यदि यह निर्णय प्रभावी होता है, तो कार मालिकों, बस संचालकों और भारी वाणिज्यिक वाहनों के चालकों को भारी असुविधा होगी। लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों के लिए समस्या अधिक गंभीर होगी। वे एक बार में पूरी टंकी भरवाते हैं। पंजाब में लगभग 4,104 पेट्रोल पंप संचालित हैं। इन पंपों पर प्रतिदिन 11 से 12 लाख यूपीआई लेनदेन दर्ज किए जाते हैं। इनकी कुल राशि 65 से 70 करोड़ रुपये के बीच रहती है। कुल ग्राहकों में से लगभग 10 प्रतिशत लोग रोजाना दो हजार रुपये से अधिक का ईंधन खरीदते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, दो हजार रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का शुल्क लगेगा। इससे डीलरों को रोजाना 5.5 लाख से 6 लाख रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान करना होगा। मासिक स्तर पर यह भार लगभग 1.65 करोड़ से 1.80 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
केंद्रीय मंत्रियों से हस्तक्षेप की मांग :
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह दोआबा, महासचिव मनजीत सिंह और कोषाध्यक्ष रंजीत सिंह गांधी ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री, वित्त मंत्री और तेल विपणन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने 14 सितंबर को जारी वित्त मंत्रालय की गजट अधिसूचना का हवाला दिया। इसमें स्पष्ट किया गया था कि ईंधन खरीद के दौरान डिजिटल माध्यमों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए।
बढ़ते खर्चों का हवाला
पंप संचालकों का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन, बिजली बिल, सुरक्षा और पंप के रखरखाव की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तय मार्जिन पर यह नया शुल्क सहना असंभव है। डीलरों को पहले से ही सीमित कमीशन मिल रहा है। एमडीआर शुल्क से उनकी वित्तीय स्थिति पर और दबाव पड़ेगा।