फिरोजपुर रोड स्थित स्थानीय होटल में आर्य समाज के पैरोकार महात्मा सत्यानंद मुंजाल की शोक सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से लोग मौजूद रहे। इस दौरान महात्मा सत्यानंद मुंजाल की सेवा करने वाले डॉक्टरों, हेल्परों और पिछले 50 साल से निष्काम भाव से उनकी सेवा कर रहे शीतल का आभार व्यक्त किया गया।
पद्मविभूषण सोनल मान सिंह ने अपने भक्ति स्वरों से महात्मा मुंजाल को श्रद्धांजलि दी। कैबिनेट मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों, मेयर हरचरण सिंह गोहलवड़िया, विधायक भारत भूषण आशु, विधायक सुरिंदर डाबर, रजिंदर भंडारी, विजय दानव, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपप्रधान अविनाश राय खन्ना, विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, आर्य समाज के सदस्यों ने भी महात्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
अविनाश राय खन्ना ने कहा कि महात्मा मुंजाल कर्मयोगी, धार्मिक, एजुकेशनिस्ट और समाज सुधारक थे। ऐसी गुणी व्यक्ति की शोक सभा प्रेरणा सभा से कम नहीं है। वह हर व्यक्ति को धार्मिक कार्य से जोड़ते और गायत्री मंत्र का जाप करने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में जब साइकिल रैली करनी थी तो महात्मा मुंजाल से संपर्क पर उनकी बनाई साइकिल पर 168 किलो मीटर की यात्रा की थी।
आार्य अखलेश्वर ने सत्यानंद मुंजाल की जीवनी पर प्रकाश डाला। महात्मा मुंजाल के बेटे महेश मुंजाल ने कहा कि उनके पिता जी कर्म और धर्म में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे। वह साइकिल इंडस्ट्री में प्रोडक्शन का काम देखते थे। जापानी लोग आए और हीरो साइकिल की प्रशंसा की व हाथ मिलाया। इसके बाद गिनीज बुक आफ रिकार्ड में नाम भी दर्ज करवाया।
सुनील मुंजाल ने बताया कि उनके पिता का साइकिल इंडस्ट्री में बेहतरीन योगदान रहा है। उनके आदर्शों को जीवन में धारण कर उनके सिद्धांतों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आर्य समाज के रजिंदर स्याल ने कहा कि महात्मा मुंजाल तीन इंस्टीट्यूशन के संस्थापक रहे। लड़कियों को शिक्षित करने के लिए आर्य कन्या गुरुकुल की स्थापना की। स्याल ने मुंजाल परिवार से अपील की कि गुरुकुल का नाम महात्मा सत्यानंद आर्य कन्या गुरुकुल के नाम से रखा जाए। योगेश मुंजाल ने कहा कि वह अपने पिता की तरह शायद मेहनत न कर पाएं लेकिन जो जिम्मेदारियां हैं, उनको मिलकर निभाना होगा।