संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग के लिए ऐसी प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता है। जो कम पानी और कम लागत में उच्च उपज प्रदान करें। ऐसी प्रौद्योगिकियों के अंतर्गत कम समय में पकने वाली किस्में और उनके लिए अनुशंसित खेती विधियों का सख्ती से पालन महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
पीएयू ने कम समय में पकने वाली किस्मों में पीआर 126 किस्म, जिसे वर्ष 2017 में राज्य में खेती के लिए अनुशंसित किया गया था, बुवाई के 93 दिन बाद पक जाती है। यह किस्म पुरानी लोकप्रिय किस्मों (जैसे पूसा 44, पिली पूसा और पीआर 118) की तुलना में 3-4 सप्ताह कम समय लेती है। अपनी अल्प परिपक्वता के कारण, पीआर 126 किस्म कीटों, बीमारियों और मौसमी गड़बड़ियों से भी बच जाती है। इस किस्म में पराली कम होने के कारण रबी फसलों की आगामी बुवाई भी आसान और समय पर हो जाती है।
एक सर्वेक्षण के आधार पर पीआर 126 की उपज 25.0 से 37.2 क्विंटल/एकड़ थी। अधिकांश किसानों की उपज 29.0-37.0 क्विंटल/एकड़ थी। जिन किसानों को 29.0 क्विंटल/एकड़ से कम उपज मिली, उन्होंने बताया कि उन्होंने इसकी बुआई जल्दी की थी तथा पौध भी अधिक उम्र में लगाई थी। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना में किए गए शोध प्रयोगों से भी पता चला है कि अधिक उपज के लिए पीआर 126 किस्म की रोपाई न तो बहुत जल्दी करनी चाहिए और न ही बहुत देर से।