आम लोगों को कोरोना से बचाने के लिए प्रशासन की सख्ती के कारण मासूम की जान चली गई। शुक्रवार को एक साल की बच्ची को लेकर परिवार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल पैदल भटकता रहा। डॉक्टरों ने भी इलाज की जगह उसे दूसरे अस्पताल भेजना बेहतर समझा।
इलाज न मिलने पर आखिरकार एक साल की बच्ची ने बुधवार को दम तोड़ दिया। शाम नगर निवासी उमेश कुमार ने बताया कि वह मजदूरी का काम करता है। उसकी दो बच्चियां है। बड़ी बेटी जानवी (6) और छोटी मानवी एक साल की थी। छह अप्रैल को उसकी छोटी बेटी मानवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
वह दूध पीने के बाद उल्टी कर रही थी। छह अप्रैल की सुबह पत्नी के साथ बच्ची को इलाज के लिए पहले अगरनगर स्थित एक निजी अस्पताल गया। उसे इतनी दूर पैदल ही जाना पड़ा, उसके पास कोई वाहन नहीं था। निजी अस्पताल ने इलाज करने की जगह उन्हें सराभा नगर स्थित दूसरे निजी अस्पताल जाने को कहा। वह वहां से पैदल फिर दूसरे अस्पताल गए।
दूसरे अस्पताल पहुंचने पर भी उनकी बेटी का इलाज नहीं हुआ। यहां पर भी उन्हें माडल टाउन स्थित तीसरे अस्पताल जाने के लिए कह दिया गया। अभी कुछ दूरी पर पहुंचे थे कि पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। कोई हल नहीं मिलने के बाद वह घर लौट आए। सात अप्रैल की सुबह उनकी बेटी की मौत हो गई।
कोरोना के शक में पहुंचा अमला
पीड़ित उमेश ने बताया कि किसी ने पुलिस को सूचना दे दी कि उनकी बेटी की मौत कोरोना के कारण हुई है। आठ अप्रैल को पुलिस टीम उनके घर पहुंच गई। उसके परिवार को कोरोना के शक में सिविल अस्पताल ले गए। जहां एक कमरे में उसे, उसकी पत्नी को रखा गया। बच्ची की मौत के संबंध में पूरी जानकारी देने के बाद गुरुवार शाम उन्हें वापस घर भेजा गया।