संवाद न्यूज एजेंसी
हलवारा। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ग्रामीण मजदूरों का आक्रोश बढ़ रहा है। किसान और मजदूर संगठनों ने मनरेगा कानून कमजोर करने का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 3 नवंबर को धूरी में होने वाली विशाल रैली की तैयारियों को राजोआणा खुर्द गांव में मनरेगा मजदूरों की बैठक में अंतिम रूप दिया गया।
मनरेगा श्रमिक संघ के नेता प्रकाश सिंह बरमी और सीटू के प्रदेश उपाध्यक्ष दलजीत कुमार गोरा ने बैठक को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है और मनरेगा को कमजोर कर रही है। नए कानून में मनरेगा मजदूरी खर्च में केंद्र की हिस्सेदारी 90 से घटाकर 60 फीसदी कर दी गई है। इससे पंजाब पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा और ग्रामीण मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। नेताओं ने बंद पड़े मनरेगा कार्य शुरू करने, मजदूरी बढ़ाकर 800 रुपये प्रतिदिन करने और 200 दिन काम की गारंटी देने की मांग की। मनरेगा कर्मचारियों को स्थायी कर उनका मासिक वेतन 42 हजार रुपये निर्धारित करने की मांग की गई।
दलजीत कुमार गोरा ने पंजाब में नशे की समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शराब माफिया का लाल नशा गरीब परिवारों को तबाह कर रहा है। उन्होंने अवैध शराब बिक्री और माफिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।