लुधियाना में मीटिंग में पहुंचे सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल।
- फोटो : अमर उजाला
डीपीआई पंजाब बलबीर सिंह ढोल ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए हाईकोर्ट ने सख्त एक्शन लेते हुए फीस कमेटी-2016 का गठन किया है। अब डीईओ भी प्राइवेट स्कूलों की जांच कर सकते हैं। ढोल सोमवार को पंजाब के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों से मीटिंग के दौरान बोल रहे थे। डीपीआई बलबीर सिंह ढोल ने यह मीटिंग प्रिंसिपलों की बात जानने और उनका फीडबैक लेने के लिए रखी थी।
इस दौरान डीपीआई ने कहा कि अगर स्कूलों में टीचर अपनी कुर्सियों को कक्षा से बाहर कर दें तो वह बच्चों को पढ़ाने में अधिक समय दे सकतेे है। कुर्सियों में बैठने के कारण वह ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को काम नहीं करवा पाते। अगर वह खड़े रहेंगे तो एक्टिव रहेंगे और बच्चों के साथ अधिक समय बिता सकेंगे।
इस मीटिंग में पहुंचे पंजाब भर के स्कूल प्रिंसिपलों ने स्कूलों में सफाई कर्मचारियों की कमी, डेपुटेशन पर गए टीचरों को वापस लाना, अध्यापकों के खाली पदों को भरना, फंड और डाक संबंधी समस्याओं को सांझा किया। डीपीआई ने इन्हें जल्द ही हल करवाने का वादा किया। डीपीआई ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के चलते पेरेंट्स का रोष बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में पेरेंट्स, स्कूल और डीसी के बीच भी मीटिंग हुई लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकला है।
अब हाईकोर्ट की ओर से फीस कमेटी-2016 का गठन किया गया है। जिसमें जिले के डीईओ को प्राइवेट स्कूलों की चेकिंग करने की अथॉरिटी दी गई है। लुधियाना में डीईओ परमजीत कौर चाहल प्राइवेट स्कूलों की चेकिंग कर उसकी रिपोर्ट बनाकर देंगी।
उन्होंने बताया कि 31 जुलाई तक सरकारी स्कूलों के पंद्रह हजार पदों को भरने की योजना है। इसके लिए सरकार प्रयत्न कर रही है। उन्होंने बताया कि कई स्कूलों में कुछ विषयों की पढ़ाई नहीं करवाई जा रही है। प्रिंसिपलों ने जिसका कारण स्कूलों में सब्जेक्टसंबंधी अध्यापक का डेपुटेशन पर होना बताया। डीपीआई ने कहा कि डेपुटेशन पर गए अध्यापकों को एक-दो दिनों में वापस भेज दिया जाएगा।
पिछली बार प्राइमरी और मिडल स्कूलों के लिए करीब चार करोड़ का फंड जारी किया गया था। उन्होंने स्कूलों से अपील की कि वह स्कूलों संबंधी फंड की रिपोर्ट बनाकर भेजें, ताकि समय पर स्कूलों को फंड जारी किया जा सके।