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जत्थेबंदियों की बैठक से राजेवाल सहित कई किसान नेता रहे नदारद, 32 में से 23 जत्थेबंदी के नेता ही शामिल हुए

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हलवारा (लुधियाना)। पंजाब की किसान जत्थेबंदियों की एक हंगामी बैठक मुल्लांपुर दाखा के गुरशरण कला भवन में हुई। बेहद अहम मुद्दों पर फैसले लेने के लिए रखी इस बैठक में पंजाब की कुल 32 में से 23 जत्थेबंदी के नेता ही शामिल हुए, जबकि 9 जत्थेबंदी ने किनारा कर लिया। खुद बलवीर सिंह राजेवाल ही बैठक से नदारद रहे। हालांकि उनकी जत्थेबंदी के अन्य नेता मौजूद थे।
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क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रमुख दर्शनपाल और बीकेयू सिद्धूपुर के जगजीत सिंह डल्लेवाल ने भी इस अहम बैठक से दूरी बना ली और उनका कोई भी नेता मुल्लांपुर नहीं पहुंचा। पंजाब के चुनावी रण में कूद चुकी किसान जत्थेबंदियों के लिए ये ठीक शगुन नजर नहीं आ रहा है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए किसान नेता बूटा सिंह बुर्जगिल, निर्भय सिंह ढूड्डीके, मंजीत सिंह राय और रूलदू सिंह मानसा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से लखीमपुर खीरी में किसानों को कुचले जाने के मामले में अधूरा इंसाफ देने और किसानों पर दर्ज मुकद्दमे वापस न लेने के खिलाफ कल 31 जनवरी को सभी जिला और तहसील हेडक्वार्टर पर पूरे जोश के साथ धरने दिए जाएंगे।
संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर पूरे देश में विश्वासघात दिवस मनाया जा रहा है, जो किसान नेता विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें धरना प्रदर्शन के मंच पर आने की इजाजत नहीं होगी। उनकी जत्थेबंदी के अन्य नेता, कार्यकर्ता मंच साझा कर सकेंगे। इसके अलावा पंजाब में कोरोना के नाम पर बंद किए गए स्कूल खुलवाने से लेकर मौसम की मार से बर्बाद फसलों के मुआवजे सहित किसानों की पूर्ण कर्ज माफी की मांग मनवाने के लिए 7 फरवरी को दोपहर 12 से लेकर 2 बजे तक पंजाब में पूर्ण चक्का जाम किया जाएगा।
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इसके अलावा उनकी जत्थेबंदियां सिख जत्थेबंदियों के साथ मिलकर सजा काट चुके अल्पसंख्यक लोगों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, छात्रों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा करवाने को भी संघर्ष करेंगी।
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से पंजाब की 22 किसान जत्थेबंदियों को 4 महीने के लिए सस्पेंड किए जाने के खिलाफ भी बैठक में प्रस्ताव पास किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने यह फैसला बहुत जल्दबाजी में लिया है, जो किसान लहर को कमजोर करेगा और केंद्र सरकार के पक्ष में जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन 22 किसान जत्थेबंदियों ने पंजाब में चुनाव लड़ने का फैसला किया था, उनमें से सिर्फ 8 जत्थेबंदियां ही चुनाव लड़ रही हैं। वहीं संयुक्त किसान मोर्चे में पहले से ही कई राजनीतिक लोग सक्रिय हैं तो पंजाब की इन 22 जत्थेबंदियों से यह भेदभाव ठीक नहीं है। वह संयुक्त किसान मोर्चे से अपील करते हैं कि अपने फैसले पर दोबारा विचार कर ये निलंबन वापस लें।
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