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उद्यमियों के रूबरू हुए उद्योग मंत्री मदनमोहन मित्तल

Sat, 21 Nov 2015 10:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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प्रदेश के उद्योग मंत्री मदन मोहन मित्तल ने शनिवार को सर्किट हाउस में यार्न, स्पीनिंग, फैब्रिक्स, टेक्सटाइल इत्यादि उद्यमियों के साथ बैठक की।
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उनकी समस्याएं जानीं, सुझाव लिए और समाधान का भरोसा दिलाया। मित्तल ने कहा कि सरकार उद्योग जगत को हर तरह की सुविधाएं देने को वचनबद्ध है। बैठक में उद्यमियों ने कड़े तेवर दिखाए और तीखे तर्कों के साथ अपनी बात रखी। पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मेहरा ने सीधे कहा कि सूबे की इंडस्ट्री वेंटिलेटर पर है। उद्योगों के हालात आतंकवाद के वक्त से भी बदतर हैं और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

लुधियाना यार्न डीलर एसोसिएशन के प्रधान राधे श्याम अहूजा ने यार्न पर वैट की दर 6.05 फीसदी से कम करके दो फीसदी करने की वकालत की। अहूजा ने कहा कि इससे यार्न के कारोबार में तेजी आएगी और कारोबारी बेहतर ढंग से काम कर पाएंगे। अधिक वैट के कारण ही यार्न का कारोबार सिमट रहा है।
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पत्रकारों से बातचीत में मित्तल ने कहा कि इंडस्ट्री को इंस्पेक्टरराज से मुक्ति दिलाई जाएगी। इस दिशा में ठोस उपाय किए जा रहे हैं। औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। बठिंडा में केबिनेट मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के साथ हुए दुर्व्यवहार पर मित्तल ने कहा कि ऐसे कृत्यों की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। बैठक में राजीव गर्ग, गगन खन्ना, सुदर्शन गोसाईं समेत कई उद्यमी मौजूद रहे।

गोसाई और मित्तल में तकरार
बैठक में उद्योगमंत्री मदन मोहन मित्तल ने पूर्व सेहत मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सतपाल गोसाई को बोलने नहीं दिया। दोनों नेताओं की आपस में हल्की तकरार हुई। इस पर गोसाईं बैठक से उठ र चलने लगे तो अन्य नेताओं एवं उद्यमियों ने उन्हें समझा बुझा कर फिर से बैठा लिया।
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बैठक में गोसाईं ने खड़े होकर आबकारी एवं कराधान विभाग में पिछले सालों में हुए 12 हजार करोड़ रुपये के वैट घोटाले के मुद्दे को उठाना चाहा। इस घोटाले को लेकर गोसाईं ने आबकारी एवं कराधान विभाग के समक्ष धरने भी दिए थे। आज बैठक में भी गोसाईं ने उसी मुद्दे को उठाना शुरू किया तो मित्तल ने गोसाईं को बोलने नहीं दिया। इस पर दोनों नेताओं की आपस में हाट टाक भी हुई। गोसाईं का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार पर कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। उन्हें बोलने तक नहीं दिया गया।
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