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धक्कामुक्की और तकरार के बाद खालसा से मिले मान

Fri, 24 Jul 2015 10:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
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सजा काट चुके बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे सूरत सिंह खालसा से मिलने के लिए शुक्रवार शाम अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान अस्पताल पहुंचे।
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जब वे अस्पताल में प्रवेश करने लगे तो पुलिस ने अस्पताल के सारे दरवाजे बंद कर मान व उनके समर्थकों को रोक लिया। मान ने जबरदस्ती अंदर जाने की कोशिश की, तो एसीपी सतीश मल्होत्रा  के साथ मान की कहासुनी हुई और हल्की धक्कामुक्की हो गई।

दस मिनट की तकरारबाजी के बाद एडीसीपी परमजीत सिंह पन्नू ने उच्चाधिकारियों के आदेश पर सिर्फ सिमरनजीत सिंह मान को अंदर जाने की इजाजत दी। इससे पहले सूरत सिंह खालसा से मिलने आए वस्सण सिंह जफ्फरवाल और कांग्रेस के पंजाब प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा को मुलाकात की इजाजत नहीं मिली।
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खालसा से मुलाकात के बाद मान ने कहा कि उनकी हालत पहले से ठीक है। अभी भी उनके हौसले बुलंद हैं। खालसा ने उन्हें कहा है कि जब तक सरकार कैदियों को रिहा नहीं करेगी तब तक वह अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे।


उन्होंने कहा कि खालसा की मांग जायज है। सरकार को उनकी मांगें मान कर उन्हें जल्द घर भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस, अकाली दल और कांग्रेस की मिलीभगत के साथ यह फैसला सुनाया है कि टाडा और संगीन आरोपों में बंद कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि सभी पार्टियों ने संसद में प्रस्ताव पास कर टाडा एक्ट को खत्म कर दिया था, तो उस एक्ट के तहत अपनी सजा पूरी कर चुके कैदियों को रिहा क्यों नहीं किया जाए।

उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ साथ मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह भी नहीं चाहते कि बंदी सिखों की रिहाई हो। इसी के चलते इतने समय से भूख हड़ताल पर बैठे खालसा से मिलने के लिए अभी तक कोई नहीं आया।

कांग्रेस प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैहरा शुक्रवार शाम सूरत सिंह खालसा से मिलने डीएमसी अस्पताल पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।


उन्होंने कहा कि जैसी तानाशाही औरंगजेब ने की थी, वही हाल आज बादल सरकार कर रही है। ऐसा हाल तो उस समय नहीं था जब देश में इमरजेंसी जैसे हालात थे। उन्होंने खालसा की बेटी से मुलाकात की और उनका हाल जाना। उन्होंने कहा कि सूरत सिंह खालसा की मांग जायज है। सिख बंदियों की रिहाई होनी चाहिए।
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