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लुधियाना पश्चिम: आप को हैट्रिक, कांग्रेस-भाजपा को वापसी की आस; किन मुद्दों पर घिर सकती है सत्तारूढ़ पार्टी

Mon, 31 Aug 2026 08:18 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना

सार

लुधियाना पश्चिम को लंबे समय तक कांग्रेस और भाजपा-शिअद गठबंधन का मजबूत गढ़ माना जाता रहा। 2022 में पूर्व कांग्रेसी गुरप्रीत सिंह बस्सी गोगी ने आप के टिकट पर जीत हासिल की। उनके निधन के बाद संजीव अरोड़ा ने उपचुनाव में जीत हासिल की।
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पंजाब चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच लुधियाना पश्चिम (064) में सियासी मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। व्यापारिक और मध्यमवर्गीय मतदाताओं वाले इस शहरी हलके पर आम आदमी पार्टी लगातार दो चुनाव जीत चुकी है। अब उसकी नजर जीत की हैट्रिक पर है। 

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वहीं कांग्रेस और भाजपा सीट वापस लेने की कोशिश में जुटी हैं। अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन नहीं हुआ तो मुकाबला और बहुकोणीय हो सकता है।

लुधियाना पश्चिम को लंबे समय तक कांग्रेस और भाजपा-शिअद गठबंधन का मजबूत गढ़ माना जाता रहा। 2022 में पूर्व कांग्रेसी गुरप्रीत सिंह बस्सी गोगी आप के टिकट पर मैदान में उतरे और कांग्रेस के दिग्गज भारत भूषण आशु को 7512 मतों से हराया। गोगी को 40443 वोट मिले जबकि आशु को 32931 वोट मिले। भाजपा के बिक्रम सिंह सिद्धू को 28107 और शिअद के महेश इंदर सिंह ग्रेवाल को 10072 वोट मिले।

जनवरी 2025 में गोगी के निधन के बाद जून में उपचुनाव हुआ। आप ने राज्यसभा सदस्य संजीव अरोड़ा को मैदान में उतारा। अरोड़ा ने 35179 वोट लेकर आशु को 10637 मतों से हराया। आशु को 24542 और भाजपा के जीवन गुप्ता को 20323 वोट मिले। शिअद के परउपकार सिंह घुम्मण को 8203 वोट मिले।

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अरोड़ा की राजनीतिक मुश्किलों से आप में टिकट की दौड़
28 जून 2025 को विधायक पद की शपथ लेने के बाद अरोड़ा ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया। तीन जुलाई को उन्हें मंत्रिमंडल में वित्त, योजना, आबकारी एवं कराधान, स्थानीय निकाय और बिजली जैसे विभाग मिले। मई 2026 में ईडी की कार्रवाई के बाद वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे हलके में विकास कार्यों और आप के अगले उम्मीदवार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आप में अरोड़ा के अलावा दिवंगत विधायक गोगी की पत्नी डॉ. सुखचैन बस्सी, तनवीर धालीवाल और जिला प्रधान जतिंदर खंगूड़ा के नाम भी चर्चा में हैं। गोगी परिवार की राजनीतिक विरासत भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

भाजपा में काैन दाैड़ में
भाजपा को 2022 और 2025 के चुनावों में मिले वोट तथा 2024 लोकसभा चुनाव में हलके से मिली बढ़त से उम्मीद है। पार्टी में जीवन गुप्ता, बिक्रम सिंह सिद्धू, राशि अग्रवाल, राकेश कपूर और जिला प्रधान सुनील मौदगिल के नाम चर्चा में हैं।

कांग्रेस के सामने चुनाैती
कांग्रेस के पास पुराना संगठन और भारत भूषण आशु का प्रभाव है लेकिन लगातार दो हार चुनौती बनी हुई है। आशु के अलावा पवन दीवान का नाम भी दावेदारों में है। अकाली दल की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है। 2025 में उसके प्रत्याशी को 8203 वोट मिले थे। परउपकार सिंह घुम्मण और महेश इंदर सिंह ग्रेवाल के नाम चर्चा में हैं।

विकास के मुद्दे बन सकते हैं चुनावी हथियार
लुधियाना पश्चिम में पार्किंग और यातायात, खस्ताहाल सड़कें, जलभराव और बुड्ढा दरिया का प्रदूषण प्रमुख समस्याएं हैं। घुमार मंडी, मॉल रोड, फिरोजपुर रोड और सराभा नगर में पार्किंग संकट से जाम रहता है। बारिश में हैबोवाल और ऋषि नगर समेत निचले इलाकों में जलभराव होता है। फिरोजपुर रोड से हंबड़ा रोड को जोड़ने वाली सड़क भी दो जगह धंस चुकी है।

बुड्ढा दरिया की बदबू और प्रदूषण तथा चोरी और झपटमारी जैसी घटनाएं भी लोगों की चिंता हैं। भाजपा नेता जीवन गुप्ता का आरोप है कि अरोड़ा ने विकास की रफ्तार चार गुना करने का वादा किया था लेकिन हलके का बुनियादी ढांचा चरमरा गया है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के बावजूद बुड्ढा दरिया की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
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1977 से था कांग्रेस का दबदबा
लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का गठन 1977 में हुआ। यहां कांग्रेस सबसे ज्यादा बार जीती है। ए. विश्वनाथन (जेएनपी) 1977, जोगिंदर पाल पांडे (कांग्रेस) 1980, हरनाम दास जौहर (कांग्रेस) 1985, 1992 और 2002, महेश इंदर सिंह (शिअद) 1997, हरीश राय ढांडा (शिअद) 2007, भारत भूषण आशु (कांग्रेस) 2012 और 2017, गुरप्रीत गोगी (आप) 2022 तथा संजीव अरोड़ा (आप) 2025 में जीते। इस सीट से अब तक कोई महिला विधायक नहीं बनी है।

2027 में आप के सामने सीट बचाने की चुनौती है। कांग्रेस वापसी और भाजपा बढ़ते जनाधार को सीट में बदलने की कोशिश करेगी। उम्मीदवार की छवि, विकास कार्य और शहरी समस्याएं चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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