महज 20 साल की उम्र, लेकिन पुलिस के मुताबिक नशा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ाव। लुधियाना ग्रामीण पुलिस ने चौकी छपार की टीम के साथ कार्रवाई करते हुए दो युवकों को 514 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बिना नंबर की एक स्प्लेंडर बाइक भी बरामद की है। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों तक फैले हेरोइन तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हैं। अब पुलिस इस नेटवर्क की सप्लाई चेन से लेकर नशे के कारोबार से अर्जित कथित संपत्तियों तक की पड़ताल करने की तैयारी में है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तरनप्रीत सिंह पुत्र गुरदीप सिंह निवासी गांव पिपलांवाला, जिला होशियारपुर और सचिन पुत्र राजेश कुमार निवासी बसंत नगर, जिम करियाना स्टोर के नजदीक, होशियारपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ थाना जोधां में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 25, 61 और 85 के तहत मामला दर्ज किया है।
समाजसेवी से मिली सूचना, नहर पुल पर बिछाया जाल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, चौकी छपार के इंचार्ज जसपाल सिंह अपनी टीम के साथ इलाके में गश्त कर रहे थे। टीम जोधां स्थित नारंगवाल चौक पर संदिग्ध वाहनों और लोगों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक समाजसेवी से सूचना मिली कि तरनप्रीत सिंह और सचिन भारी मात्रा में हेरोइन लेकर जोधां और लुधियाना के अन्य इलाकों में अपने साथी तस्करों को सप्लाई करने आ रहे हैं।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने ढैपई नहर पुल पर गुप्त नाकाबंदी कर दी। इसी दौरान बिना नंबर की स्प्लेंडर बाइक पर आते दिखाई दिए दोनों युवकों को पुलिस ने घेर लिया और मौके पर ही काबू कर लिया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 514 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को भागने का मौका नहीं मिला।
पुलिस जांच में सामने आया है कि तरनप्रीत सिंह के खिलाफ एक सितंबर 2025 को जिला शहीद भगत सिंह नगर के थाना सिटी नवांशहर में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। उसके खिलाफ अन्य मामलों की जानकारी भी सामने आई है। वहीं, दूसरे आरोपी सचिन का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
जिला लुधियाना ग्रामीण के एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता, एसपी (डी) राजन शर्मा और डीएसपी दाखा करण सिंह संधू और थाना जोधां की प्रभारी इंस्पेक्टर किरनदीप कौर के मुताबिक, आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड मांगा जाएगा। पूछताछ के दौरान हेरोइन की सप्लाई चेन, तस्करी में शामिल अन्य लोगों और पैसों के लेनदेन यानी मनी ट्रेल का पता लगाने पर जोर रहेगा।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि कथित नशा तस्करी से आरोपियों ने कोई जमीन-जायदाद या अन्य संपत्ति तो नहीं बनाई। यदि जांच में अपराध से अर्जित संपत्ति के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के मुताबिक उसे कुर्क कराने की कार्रवाई की जाएगी।