दादी से लगाव बना सफलता का कारण
आर्यन बताते हैं कि जब वे करीब आठ वर्ष के थे, तब उनकी दादी चौथी स्टेज के कैंसर से जूझ रही थीं। उनका दादी से गहरा लगाव था। वे उनके साथ समय बिताते, उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाते और हमेशा उनके पास ही रहते थे। परिवार में कई अनुभवी डॉक्टर होने के बावजूद दादी को बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी। तभी उन्होंने तय कर लिया कि भविष्य में ऑन्कोलॉजिस्ट बनकर कैंसर के इलाज और शोध के क्षेत्र में काम करेंगे।
आर्यन की इस सफलता में उनके बड़े भाई का योगदान भी अहम रहा। उनके भाई ने पिछले वर्ष नीट में ऑल इंडिया रैंक-54 हासिल की थी और फिलहाल दिल्ली के प्रतिष्ठित मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। तैयारी के दौरान भाई ने उन्हें विषयों की रणनीति, नोट्स तैयार करने का तरीका, समय प्रबंधन और परीक्षा के तनाव से निपटने के गुर सिखाए। जब भी आत्मविश्वास कमजोर पड़ता, भाई उनका हौसला बढ़ाते रहे।