महंगे आलू-प्याज पर घिरी केंद्र सरकार के सख्त कदम आलू सीड निर्माताओं को रास नहीं आ रहे हैं। सीड निर्माताओं ने साफ किया है कि यदि आवश्यक वस्तु अधिनियम को आलू सीड पर भी लागू किया गया और इसकी स्टॉक लिमिट तय की गई तो अगले सीजन के लिए सीड की कमी हो जाएगी, नतीजतन आम लोगाें को आलू 50 रुपये प्रति किलो में भी नहीं मिलेगा।
इस बारे में कंफेडरेशन ऑफ पटेटो सीड्स फारमर्स (पास्कॉन) ने केंद्र एवं राज्य सरकार को पत्र लिख कर मांग की है कि आलू सीड को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर रखा जाए।
केंद्र सरकार ने आलू और प्याज की कीमतों में कमी लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत स्टॉक लिमिट लागू करने के साथ-साथ न्यूनतम निर्यात मूल्य में भी इजाफा किया गया है, ताकि देश में इन उत्पादों की उपलब्धता को बढ़ाया जा सके। लेकिन इन कदमों से सीड निर्माताओं की नींद हराम हो गई है।
आलू सीड निर्माताओं का तर्क है कि पंजाब में अस्सी हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन पर आलू की पैदावार की जाती है। सूबे में आलू का साढ़े तीन करोड़ बोरी (50 किलो प्रति बोरी) का उत्पादन किया जा रहा है। इसमें से अस्सी फीसदी आलू सीड के लिए उपयोग किया जाता है। अक्तूबर में आलू की बीजाई की जाती है और दिसंबर जनवरी तक इसकी फसल आ जाती है। फरवरी-मार्च से आलू स्टोर में रहता है और फिर अक्तूबर में सीड वाले आलू से अगली फसल की बीजाई की जाती है।
पास्कॉन के प्रधान सुखजीत सिंह भट्टी का कहना है कि साढ़े तीन करोड़ बोरी में से कुछ आलू बाजार में बेचने के बाद सवा तीन करोड़ बोरी कोल्ड स्टोर में स्टॉक कर दी जाती है। इसमें से 2.80 करोड़ बोरी का उपयोग सीड के लिए किया जाता है। आलू सीड की 50 लाख बोरी की खपत पंजाब में होती है। जबकि 2.30 करोड़ बोरी को गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और असम में आलू सीड के तौर पर भेजा जाता है। पंजाब देश की कुल आलू सीड मांग की साठ फीसदी की आपूर्ति करता है।
भट्टी का कहना है कि सरकार के फैसले के बाद सीड निर्माता असमंजस की स्थिति में है। यदि सरकार ने सीड के स्टॉक पर भी सख्ती की तो इसका सीधा असर अगले सीजन की पैदावार पर होगा। पैदावार कम होने से अगली बार आलू के दाम आसमान छूने लगेंगे। इसलिए सीड वाले आलू को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर निकाला जाए।