सुनाम में चक्काजाम आंदोलन में भाग लेतीं महिलाएं।
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सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)। खेती कानूनों के विरोध में किसानों के तीन घंटे चक्का जाम आंदोलन में महिलाओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। किसान परिवारों की सैकड़ों महिलाएं शनिवार को बठिंडा पटियाला मुख्य मार्ग पर किए गए चक्का जाम में शामिल हुईं और कृषि कानूनों का विरोध किया।
महिलाओं ने आंदोलन का नेतृत्व कर रही टीम का हौसला बढ़ाया। बुजुर्ग महिलाओं से लेकर हरेक उम्र वर्ग की महिलाओं को आंदोलन में केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। महिलाएं कृषि कानूनों को उनकी जमीनें छीनने वाले कानून की नजर से देख रही हैं। गांव उगराहां की बुजुर्ग परमजीत कौर ने अपने अंदाज में कहा कि सानूं हुण रोटी दी नहीं सगों अपनी जमीन दी फिक्र ए। ऐह मोदी सरकार साडियां जमीनां वडे लोकां दे हत्था विच्च देना चाहुंदी ए पर अस्सीं अपनी जमीनां नूं बचाऊण लई किसे वी हद तक संघर्ष करण लई तैयार हां।
गांव छाजली की चरणजीत कौर ने कहा कि जमीन बचाऊण लई तां ओह अपनी जान दे सकदियां हण। इस संघर्ष विच्च शामिल होना केहडी वडी गल्ल ए। महिलाओं ने कहा कि पिछले तीन महीने से किसानों के पूरे परिवार आंदोलन में भाग ले रहे हैं और जब तक कृषि कानून रद्द नहीं होंगे संघर्ष जारी रहेगा। इस मौके पर जनक सिंह, गोबिंद सिंह, रामपाल सिंह, नरिंदर सिंह, भगवान सिंह, सिकंदर सिंह, परविंदर सिंह, गुरलाल सिंह, भोला सिंह, रामशरण सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।