16 जनवरी से बंदी सिखों की रिहाई के लिए भूख हड़ताल पर बैठे सूरत सिंह खालसा ने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि यदि संघर्ष के दौरान उनकी मौत होती है तो उनके शव को तीन तख्तों के दर्शन कराए जाएं और शव का तब तक संस्कार न किया जाए, जब तक बंदी सिखों की रिहाई न हो जाए। बंदियों की रिहाई के बाद ही उनका अंतिम संस्कार किया जाए। पीजीआई में इलाज के दौरान खाना खाने का वीडियो वायरल होने के बाद से खालसा ने पानी तक त्याग दिया है। खालसा की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। उनकी खराब सेहत को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने गांव हसनपुर में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी है। जगरांव के एसएसपी रवचरण सिंह बराड़ ने मंगलवार को खालसा के घर जाकर उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बातचीत से इंकार कर दिया।
शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह मान भी मंगलवार को विशेष तौर पर खालसा का हाल जानने गांव हसनपुर पहुंचे। मान ने कुछ वक्त तक उनके साथ बंद कमरे में बैठक की। बाद में पत्रकारों से बातचीत में मान ने कहा कि सिख कौम के संघर्ष को फेल करने के लिए बादल सरकार ने सूरत सिंह खालसा संघर्ष कमेटी के नेताओं को जेलों में बंद कर रखा है, ताकि बंदी सिखों की रिहाई के लिए उठ रही आवाज को दबाया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र और सूबा सरकार खालसा के संघर्ष को हलके में ले रही है। मान ने कहा कि खालसा की शहादत के बाद भी संघर्ष जारी रखा जाएगा। कई और सिख भी भूखहड़ताल पर बैठने को तैयार हैं।
मान ने कहा कि राष्ट्रपति के पास अधिकार हैं कि वे बंदी सिखों की रिहाई के लिए आदेश जारी कर सकते हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार जानबूझ कर यह मुद्दा लटकाए जा रही हैं। मान ने आरोप लगाया कि सीएम प्रकाश सिंह बादल और डिप्टी सीएम सुखबीर बादल सिख कौम के खिलाफ घटिया भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। जल्दी ही खालसा के सिख संघर्ष को तेज करने केे लिए सर्व पार्टी बैठक बुलाई जा रही है। इसमें सभी पार्टियों को आमंत्रित किया जाएगा। सिख कौम खालसा के साथ खड़ी है। यदि उनको कोई नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदार अकाली-भाजपा सरकार होगी। इस अवसर पर जसवंत चीमा, रविंदरजीत सिंह गोगी और कर्म सिंह मौजूद रहे।
खालसा ने अपनी अंतिम इच्छा जताई