पंजाब कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने कहा कि पंजाब की धरती को मनुष्य लहू के बजाय पानी की ज्यादा जरूरत है। मुख्यमंत्री बादल को कुर्बानी मांगने के बजाय किसानों के मसलों को हल करवाने के लिए मोदी सरकार पर दबाव बनाना चाहिए। यह मांग जाखड़ ने रविवार को प्रेसवार्ता के दौरान की।
उन्होंने बताया कि कपास की फसल पर सफेद मक्खी का हमले की गिनती खतरे के जोन को पार कर प्रति पत्ता 20 से 25 तक पहुंच चुकी है। लेकिन अफसोस जनक पहलू यह भी है कि पिछली असफलता से सबक सीख कर सरकार ने इस समस्या के हल के लिए कोई ठोस कदम नही उठाए।
जाखड़ ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग के पूर्व डायरेक्टर मंगल सिंह के खिलाफ नौ माह बीतने के बावजूद पुलिस चालान पेश नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि सफेद मक्खी के हमले के जिम्मेवार संतरी से लेकर मंत्री तक किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां तक मुआवजे का सवाल है, वह उन्हीं को दिया गया है जो नीली पगड़ी बांधते थे या फिर अकाली दल के चमचे थे। लेकिन आम किसान तक कपास की फसल का मुआवजा नहीं पहुंच पाया।
जाखड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार की ढीली पैरवी के चलते एसवाईएल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पंजाब के खिलाफ आएगा। इस लिए पहले ही खुदकुशियां कर रहे किसानों का बलिदान मांगने के बजाय बादल समेत वह सभी नेता खुद कुर्बानी दे जो अपने आप को किसानों का हितेषी कहलाते हैं।
जाखड़ ने कहा कि बीते साल सफेद मक्खी के हमले के खिलाफ किसानों द्वारा किए गए संघर्ष के दबाव से बेशक राज्य सरकार ने एक अक्तूबर को मुआवजे का एलान कर दिया था, लेकिन 14 अक्तूबर को बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ रोष प्रगटाने वाले लोगों पर गोली का कहर बरपा कर किसानों के आंदोलन को प्रदेश सरकार ने मिट्टी में रोल दिया।
जाखड़ ने कहा कि धान की फसल की खरीद के लिए गंभीर मुश्किल पैदा होने वाली हैं, क्योंकि कैश क्रेडिट लिमिट का मामला अभी बीच में ही अटका हुआ है, दूसरी तरफ सफेद मक्खी ने कपास की फसल को बुरी तरह से बर्बाद कर देना है।
शनिवार को हुई एक घंटे की बारिश से बठिंडा में जमा हुए पानी पर टिप्पणी करते हुए जाखड़ ने कहा कि सुखबीर बादल पानी में चलने वाली बसों को पहले ट्रायल के तौर पर बठिंडा में चला लें।