हीरो ग्रुप के संस्थापक सत्यानन्द मुंजाल
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पाकिस्तान के कमालिया गांव में बहादुर चंद मुंजाल के घर जन्मे दयानंद मुंजाल, सत्यानंद मुंजाल, बृज मोहन लाल मुंजाल और ओपी मुंजाल ने अपने जीवन काल में औद्योगिक क्षेत्र में ऐसा कमाल कर दिखाया कि उनकी उद्यमिता का लोहा पूरी दुनिया ने माना। 1944 में चारों भाइयों ने पाकिस्तान से अमृतसर आकर साइकिल पार्ट्स की सप्लाई का काम शुरू किया।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। पिछले आठ माह के दौरान हीरो परिवार ने अपने तीन मार्गदर्शक खो दिए। इससे परिवार स्तब्ध है। 13 अगस्त 2015 को हीरो परिवार के हरफनमौला सदस्य, शायर और उद्यमी ओम प्रकाश मुंजाल ने इस दुनिया को अलविदा कहा। अभी इस गम से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि एक नवंबर 2015 को हीरो मोटरकॉर्प के सीएमडी पद्मभूषण बृज मोहन लाल मुंजाल का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वीरवार को महात्मा सत्यानंद मुंजाल ने संसार को अलविदा कह दिया।
हालांकि दयानंद मुंजाल कई साल पहले इस दुनिया से विदा ले गए, बावजूद इसके तीनों भाइयों ने हिम्मत नहीं हारी और साइकिल, मोटरसाइकिल के अलावा शिक्षा और रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी अपना सिक्का जमाया। आज हीरो ग्रुप का हजारों करोड़ का टर्नओवर है। बंटवारे के वक्त मुंजाल परिवार अमृतसर से शिफ्ट होकर लुधियाना आ गया। यहां पर चारों भाइयों ने मिल कर हीरो साइकिल्स कंपनी के तहत साइकिलों का निर्माण शुरू किया।
विश्व में सबसे अधिक उत्पादन करने पर हीरो का नाम 1986 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। जुलाई 2015 में 5.35 लाख साइकिल बेचकर हीरो ने नया रिकार्ड कायम किया। ओपी मुंजाल के निधन के बाद उनके बेटे पंकज मुंजाल ने अपने पिता की राह पर चलकर हीरो को नई बुलंदियों पर पहुंचाया। हीरो ने हाल ही में श्रीलंका और इंग्लैंड में साइकिलों की कंपनी खरीदी हैं। जबकि चेन्नई में बीएमडब्ल्यू की चेसिस बनाने की इकाई लगाई है।
वहीं होंडा के साथ तालमेल होने के बाद बृज मोहन लाल मुंजाल अपने परिवार के साथ दिल्ली में शिफ्ट हो गए। उनको 2005 में पद्म भूषण से नवाजा गया। आज हीरो मोटरकॉर्प देश की सबसे अधिक मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी है। इसके अलावा हीरो मोटरकार्प ने गुड़गांव में बीएम लाल मुंजाल यूनिवर्सिटी भी शुरू की है। हीरो होम्स के जरिए रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी पैर पसारे।