कनाडा सीमा सेवा एजेंसी ने जबरन वसूली और संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में पंजाब के पलविंदर सिंह, जसमेर सिंह, अमितोज बाजवा और साहिबजोत सिंह को कनाडा से निर्वासित किया है।
कनाडाई अधिकारियों के मुताबिक चारों मामले आपराधिक संगठनों, गंभीर अपराध, हथियारों, गोलीबारी या जबरन वसूली से जुड़े हैं।
यह कार्रवाई किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। कनाडा में जबरन वसूली के नेटवर्क को तोड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सितंबर 2026 में अब तक 188 निष्कासन आदेश जारी किए गए और 111 विदेशी नागरिकों को कनाडा से बाहर किया जा चुका है । इनमें प्रशांत क्षेत्र में 91 आदेश जारी कर 58 लोगों को, प्रेयरी क्षेत्र में 47 आदेश जारी कर 30 लोगों को और ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र में 50 आदेश जारी कर 23 लोगों को निर्वासित किया गया।
क्या है पूरा मामला
पलविंदर सिंह को 2025 में जबरन वसूली से जुड़ी गोलीबारी की घटना से संबंधित बताया गया है। कनाडा के आव्रजन एवं शरणार्थी बोर्ड ने उसे ऐसे आपराधिक संगठन की सदस्यता से जुड़ा पाया, जिसका संबंध जबरन वसूली से जुड़ी हिंसा से था। इसके बाद उसे कनाडा से निकाल दिया गया।
जसमेर सिंह के मामले में कनाडाई एजेंसी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि उसे कनाडा में किसी व्यक्ति को जबरन कैद रखने के अपराध में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद आव्रजन एवं शरणार्थी संरक्षण अधिनियम के तहत गंभीर आपराधिकता के आधार पर उसे कनाडा में रहने के लिए अयोग्य पाया गया और निर्वासन आदेश लागू किया गया।
अमितोज बाजवा को ऐसे संगठन की सदस्यता के आधार पर कनाडा में रहने के लिए अयोग्य पाया गया जो आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। कनाडाई एजेंसी ने उसे हथियारों से संबंधित गतिविधियों और जबरन वसूली से जुड़ी गोलीबारी के मामले से भी जोड़ा है। इसके बाद उसे कनाडा से बाहर कर दिया गया।
साहिबजोत सिंह भी ऐसे आपराधिक संगठन से जुड़ा विदेशी नागरिक बताया गया है। कनाडाई आव्रजन बोर्ड के समक्ष उसने संगठन की आपराधिक गतिविधियों का हिस्सा रहे अपराधों को स्वीकार किया। इसके बाद उसे कनाडा से निर्वासित कर दिया गया।
पंजाब के लिए सबसे बड़ी चिंता
इन मामलों का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि विदेश में भविष्य बनाने पहुंचे कुछ पंजाब के युवा कथित तौर पर ऐसे नेटवर्कों तक पहुंच रहे हैं, जिनकी गतिविधियों में जबरन वसूली, धमकी, हथियार और हिंसा शामिल हैं। कनाडा सीमा सेवा एजेंसी का कहना है कि वह देशभर में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान और जांच कर रही है, जिनकी गतिविधियां सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। कनाडा ने प्रशांत और प्रेयरी क्षेत्रों में अगस्त 2025 से जबरन वसूली से संभावित रूप से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष संसाधन लगाए थे। नवंबर 2025 में इस अभियान को ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र तक भी बढ़ाया गया।
पंजाब के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में सक्रिय कई आपराधिक गिरोहों के तार विदेशों तक जुड़े होने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। कुछ ही दिन पहले पंजाब पुलिस ने मोल्दोवा से कथित गैंगस्टर अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत दलम को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की। उसके खिलाफ पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास, मादक पदार्थों, हथियारों और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े 21 मामले बताए गए हैं।
पुलिस के अनुसार उसके कथित अपराधों में लक्षित हत्याएं, जबरन वसूली और हथियारों की तस्करी भी शामिल है। इससे साफ है कि पंजाब में अपराध की दुनिया अब केवल स्थानीय गलियों तक सीमित नहीं रही। विदेशों में बैठे अपराधी गिरोह और भारत में मौजूद उनके कथित संपर्क एक-दूसरे से जुड़े होने के आरोपों की जांच लगातार सामने आ रही है।
कनाडा का संदेश साफ है, विदेशी नागरिक यदि संगठित अपराध और जबरन वसूली के नेटवर्क का हिस्सा पाए जाते हैं तो केवल गिरफ्तारी ही नहीं, देश से निष्कासन भी संभव है। पंजाब के उन युवाओं के लिए यह बड़ा सबक है जो विदेश में सुनहरे भविष्य का सपना लेकर जाते हैं।