जिले का सिविल अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार सिविल अस्पताल के मुलाजिमों ने पांच सौ रुपये बधाई न देने पर मरीज को उसका नवजात बच्चा नहीं दिया। इसके बाद मरीज के परिजनों ने उन्हें चार सौ रुपये बधाई दी तो बच्चा मरीज को दिया गया।
अगले दिन अस्पताल कर्मचारियों ने मरीज के रिश्तेदारों को भी बधाई के बिना अंदर नहीं जाने दिया। जब परिजनों ने शोर मचाया तो अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में मरीज को छुट्टी दे दी। मामला एसएमओ डॉ. परविंदरपाल सिंह सिद्धू के पास पहुंचा तो उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए ठेके पर भर्ती तीन क्लास फोर कर्मचारी और एक स्वीपर को काम से निकाल दिया। साथ ही ठेकेदार को भविष्य में ऐसी गलती होने पर ठेका कैंसिल करने की चेतावनी दी।
जानकारी के अनुसार ज्योति के परिजनों ने उसे वीरवार को सिविल अस्पताल के मदर्स एंड चाइल्ड अस्पताल में दाखिल कराया। वीरवार देर रात ज्योति ने नार्मल डिलीवरी से एक बेटे को जन्म दिया। जब अस्पताल के कर्मचारी ज्योति को दूसरे कमरे में शिफ्ट करने के लिए गए तो उन्होंने ज्योति के परिजनों से पांच सौ रुपये बधाई के तौर पर मांगे। परिजनों ने कुछ देर रुकने के लिए कहा तो मुलाजिमों ने उन्हें बच्चा नहीं दिया।
इसके बाद ज्योति के साथ मौजूद उसके परिजन ने चार सौ रुपये कर्मचारी को दिए। जिसके बाद उन्हें बेटा दिया गया। अगले दिन जब ज्योति के रिश्तेदार अस्पताल में आए तो कर्मचारियों ने उन्हें भी रोक लिया और अंदर जाने देने के लिए उनसे भी बधाई मांगी। इस पर ज्योति के परिजनों ने शोर मचा दिया। इस पर अस्पताल ने ज्योति को छुट्टी दे दी। मामला एसएमओ के पास पहुंचा तो उन्होंने मामले की जांच के लिए दो डॉक्टरों और मैटर्न का बोर्ड बनाया। इसके बाद तीन क्लास फोर कर्मी और एक स्वीपर की काम से छुट्टी कर दी गई।
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अस्पताल प्रशासन की तरफ से अस्पताल में बधाई न देने के बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन मरीज के परिजन या अन्य रिश्तेदार ही कर्मचारियों को बधाई देते है। इस मामले में ठेकेदार को चेतावनी दे दी गई है कि भविष्य में उसके द्वारा ठेके पर रखे कर्मचारियों ने कोई गलती की तो उसका ठेका कैंसिल कर दिया जाएगा।
- डॉ. परविंदरपाल सिंह सिद्धू, एसएमओ, सिविल अस्पताल