विजिलेंस की जांच में सामने आया कि बसंत एवेन्यू इलाके में 66 केवी क्षमता का बिजली सबस्टेशन स्थापित करने के लिए मेसर्स दामिनी रिजॉर्ट एंड बिल्डर्स के डायरेक्टर अमित गर्ग ने पावरकॉम के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर कॉलोनी में 1015 वर्ग गज जमीन पर सबस्टेशन बनवा दिया गया।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की आर्थिक अपराध शाखा ने नियमों की अनदेखी कर निजी बिल्डर को करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
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विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए पीएसपीसीएल के पूर्व मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) केडी चौधरी, पूर्व वरिष्ठ एक्सईएन संजीव प्रभाकर और बिल्डर अमित गर्ग को गिरफ्तार किया है।
मामला 2021 में शुरू हुई सतर्कता जांच के बाद दर्ज आपराधिक केस से जुड़ा है।
विजिलेंस की जांच में सामने आया कि बसंत एवेन्यू इलाके में 66 केवी क्षमता का बिजली सबस्टेशन स्थापित करने के लिए मेसर्स दामिनी रिजॉर्ट एंड बिल्डर्स के डायरेक्टर अमित गर्ग ने पावरकॉम के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर कॉलोनी में 1015 वर्ग गज जमीन पर सबस्टेशन बनवा दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार यदि उस समय शीर्ष अधिकारियों ने आसपास की सभी जुड़ी कॉलोनियों की एनओसी और कुल बिजली लोड की संयुक्त जांच करवाई होती तो नियमानुसार पूरा खर्च कॉलोनाइजर को उठाना पड़ता।
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जांच में यह भी खुलासा हुआ कि केंद्रीय बिजली मंत्रालय की गाइडलाइंस की अनदेखी कर खेतों के बीच यह सबस्टेशन बना दिया गया। पाखोवाल लिंक रोड से करीब तीन किलोमीटर अंदर स्थित इस जगह तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। इसके बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने जमीनी हकीकत फाइलों में छुपाकर प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया।
अन्य अधिकारियों की भूमिका की हो रही जांच
विजिलेंस के अनुसार तत्कालीन एक्सईएन संजीव प्रभाकर समेत फील्ड अधिकारियों ने खामियों से भरी रिपोर्ट भेजी और तत्कालीन सीएमडी केडी चौधरी ने बिना आपत्ति मंजूरी दे दी। इससे बसंत एवेन्यू कॉलोनी के प्रमोटर को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचा। विजिलेंस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एजेंसी अब इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य अधिकारियों और लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।