बड़े अपराधियों को चंद घंटों में काबू करने का दम भरने वाली लुधियाना पुलिस नौ साल में अपने एक लापता हवलदार को नहीं ढूंढ सकी है। नौ साल बाद थाना पीएयू ने 25 जून को हवलदार रणजीत सिंह के लापता होने की एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर भी पत्नी की तरफ से पुलिस कमिश्नर के पास गुहार लगाने के बाद दर्ज की गई है। इस मामले में पीड़ित महिला को पुलिस विभाग की तरफ से कोई मदद राशि भी नहीं दी गई है। ऐसे में पीड़िता अपने तीन बच्चों को पालने के लिए जम्मू स्थित मायके में फास्ट फूड बेचकर गुजर बसर कर रही है।
जम्मू के बागे बहु पार्क के नजदीक काली मंदिर निवासी सीमा ने बताया कि 1995 में उसका विवाह पंजाब पुलिस में तैनात हवलदार रणजीत सिंह के साथ हुआ था। रणजीत सिंह पंजाब के कोटकपूरा के रहने वाले थे। पति की ड्यूटी लुधियाना पुलिस में थी। 16 अगस्त 2012 को रणजीत सिंह आम दिनों की तरह घर से ड्यूटी के लिए गए थे, लेकिन उसके बाद घर नहीं लौटे। उसने हर जगह पति की तलाश की और पुलिस को शिकायत भी दी लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार वह अपने तीन बच्चों के साथ जम्मू में अपने मायके में आकर रहने लगी।
सीमा ने बताया कि कुछ समय बाद पंजाब पुलिस के मुलाजिम घर आए और उससे एक कागज पर साइन करवा कर चले गए। ऐसा कई बार हुआ। सीमा के मुताबिक पति ने लगभग 18 साल पुलिस की नौकरी की, लेकिन नौ साल में मदद के नाम पर उन्हें एक पाई नहीं दी गई। कुछ समय पहले जब पुलिस मुलाजिम उनके घर आए तो उन्होंने बताया कि उनके पति को नौकरी से डिसमिस किया जा रहा है। उसने गुहार लगाई कि वह कम से कम बच्चों को पालने के लिए पेंशन ही लगवा दें।
इसके बाद वह पुलिस कमिश्नर दफ्तर में पेश हुई। यहां उसने बताया कि वह घर में फास्ट फूड बेचकर किसी तरह तीन बच्चों को पाल रही है। पिता का साया काफी समय पहले सिर उठ गया था। मां भी कैंसर से जूझ रही है। बड़ा बेटा 23 साल का हो चुका है। पुलिस अधिकारियों से गुहार है कि पति की पेंशन लगाई जाए, ताकि वह बच्चों का पालन पोषण कर सके। इसके बाद हवलदार की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज की गई।