लुधियाना। भारत माला परियोजना के तहत दिल्ली-कटड़ा हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसान सड़क पर उतर आए हैं। वीरवार को लुधियाना में डीसी दफ्तर के बाहर किसान रोड संघर्ष कमेटी के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने धरना दिया। धरने में किसान नेताओं ने साफ कहा कि वह किसी कीमत पर अपनी महंगी जमीन कौड़ियों के भाव सरकार को नहीं देंगे। उन्होंने पंजाब की कैप्टन सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह भी सीधे तौर पर केंद्र सरकार से मिल चुकी है। लेकिन इस संघर्ष में संयुक्त किसान मोर्चा का उन्हें समर्थन मिल चुका है। इसलिए आने वाले दिन में वह लुधियाना से गुजरने वाले हाईवे पर चक्काजाम करने के साथ पक्का मोर्चा भी लगा सकते हैं।
किसान नेता गुरचरण सिंह हवास ने कहा कि जितनी भी योजनाओं के तहत पंजाब में जमीन का अधिग्रहण हो रहा है, उसमें सबसे ज्यादा जमीन लुधियाना से है। उनकी जमीन के दाम 35 लाख रुपये से लेकर चार करोड़ रुपये प्रति एकड़ है। लेकिन सरकार उन्हें मुआवजे के तौर पर दस लाख रुपये प्रति एकड़ दे रही है। जैसे खेती के काले तीन कानून लगाए गए, उसी तर्ज पर यह किसानों की महंगी जमीन लूटने का एक जरिया बन गया है। उन्होंने उदाहरण देते बताया कि संगरूर के एक गांव में तो मुआवजा नौ लाख रुपये प्रति एकड़ दिया गया है। जबकि सरकार ने काफी समय पहले एक एक्ट बनाया था, इसमें मार्केट रेट से चार गुणा ज्यादा दाम देने की बात कही गई थी। केंद्र सरकार के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पंजाब सरकार करती है, लेकिन वह भी पंजाब के किसानों के साथ नहीं है। इस मुद्दे को लेकर वह कुछ दिन पहले डीसी वरिंदर शर्मा को एक ज्ञापन सौंप कर गए थे। इसमें वीरवार को एक सांकेतिक धरने की बात कही गई थी। अगर इसके बाद भी उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया तो वह लुधियाना से गुजरने वाले हाईवे पर पूरी तरह से मोर्चाबंदी कर पक्के धरने लगा देंगे।