फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईपीएफ की सीमा बढ़ी: पंजाब के करीब दो लाख कर्मचारियों को फायदा, उद्योग पर बढ़ेगा लागत का बोझ

Thu, 17 Sep 2026 08:41 AM IST
Nivedita राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना

सार

ईपीएफओ के केंद्रीय बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य एवं वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा कि सीमा बढ़ने से करीब दो लाख कर्मचारियों को लाभ होगा। दूसरी ओर नियोक्ता को 12 प्रतिशत हिस्सा देना होगा।
विज्ञापन
ईपीएफ - फोटो : Istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्र सरकार ने ईपीएफ कवरेज की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दी है। इससे 15 हजार से अधिक और 25 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी ईपीएफ के सामाजिक सुरक्षा दायरे में आ सकेंगे। पंजाब में करीब दो लाख कर्मचारियों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि उद्योग जगत ने इस फैसले से लागत बढ़ने की चिंता जताई है।

विज्ञापन


ईपीएफ में सामान्य स्थिति में कर्मचारी और नियोक्ता का योगदान 12-12 प्रतिशत रहता है। योगदान की दर में बदलाव नहीं किया गया है बल्कि अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा बढ़ाई गई है। उद्योग जगत का कहना है कि इससे नियोक्ता का खर्च बढ़ेगा।

ईपीएफओ के केंद्रीय बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य एवं वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा कि सीमा बढ़ने से करीब दो लाख कर्मचारियों को लाभ होगा। दूसरी ओर नियोक्ता को 12 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। इससे 25 हजार रुपये वेतन वाला कर्मचारी उद्यमी को करीब 28 हजार रुपये का पड़ेगा। यानी प्रति कर्मचारी करीब तीन हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
विज्ञापन


जिंदल ने कहा कि पंजाब में न्यूनतम वेतन 16 हजार रुपये से अधिक है। पहले 15 हजार रुपये से अधिक वेतन पर ईपीएफ वैकल्पिक होने के कारण कई कर्मचारी इसके दायरे में नहीं आते थे। अब 25 हजार रुपये तक वेतन वालों का ईपीएफ कटेगा। इसके अलावा नियोक्ता को कर्मचारी का छह प्रतिशत ईएसआई योगदान भी देना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक सुरक्षा का बोझ उद्योग पर डाल रही है। वैश्वीकरण के दौर में भारतीय उद्योग का मुकाबला चीन से है जहां इस तरह का बोझ उद्योग पर नहीं है। सरकार ने नए कर्मचारियों का हिस्सा खुद देने की योजना शुरू की थी लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। लगातार बढ़ती लागत से उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी।

फेडरेशन ऑफ पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन्स के महासचिव आरके सिंगला ने कहा कि अब 25 हजार रुपये से कम वेतन पाने वाले हर कर्मचारी का ईपीएफ काटना होगा। कर्मचारी का हिस्सा ईपीएफओ में जमा कराने की जिम्मेदारी भी नियोक्ता की है। कई कर्मचारी ईपीएफ कटवाना नहीं चाहते जिससे विवाद बढ़ सकते हैं। सरकार को नियम सरल बनाने चाहिए ताकि उद्योग बेहतर ढंग से काम कर सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें