संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज विश्वविद्यालय में डेयरी फार्मिंग को टिकाऊ बनाने पर विचार-विमर्श सत्र हुआ। विशेषज्ञों ने पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सालभर गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। चारा उत्पादन: वर्तमान स्थिति, चुनौतियां एवं भविष्य की रणनीति विषय पर आयोजित इस सत्र में 86 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने गुणवत्तापूर्ण चारे और बेहतर कृषि तकनीकों को अहम बताया। उन्होंने चारा उत्पादन में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना की जानकारी दी। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने मशीनीकरण और साइलेज तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन का सामना करने में सक्षम किस्मों के उपयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. मखन सिंह भुल्लर ने चारे की वैज्ञानिक खेती की आवश्यकता पर बल दिया। पशु आहार विभाग के प्रमुख डॉ. जसपाल सिंह हुंदल ने चुनौतियों के समाधान में युवाओं की भागीदारी को अहम बताया।
उन्नत बीज और साइलेज तकनीक
अटारी जोन-1, लुधियाना के डॉ. आरके राणा ने किसानों तक बेहतर तकनीकें पहुंचाने में कृषि अनुसंधान की भूमिका बताई। पीएयू के डॉ. आरएस सोहू ने चारे की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों और गुणवत्तापूर्ण बीजों पर चर्चा की। डॉ. नवजोत सिंह बराड़ ने पंजाब में चारा उत्पादन की स्थिति बताई, जबकि डॉ. राहुल कपूर ने नई किस्में विकसित करने के कार्यक्रमों की जानकारी दी। विपिन शर्मा ने बुआई, कटाई और साइलेज तैयार करने में मशीनीकरण की भूमिका समझाई। डॉ. अल्ला सिंह ने उच्च गुणवत्ता वाला साइलेज बनाने में मक्का के उपयोग पर बात की। डॉ. रुचिका भारद्वाज ने जलवायु-अनुकूल चारा उत्पादन की संभावनाओं और टिकाऊ पशुपालन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. जसपाल सिंह लांबा ने चारे की गुणवत्ता, पोषण और साइलेज तैयार करने की बेहतर तकनीकों पर जानकारी साझा की।