पंजाब का लुधियाना साइबर अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। क्योंकि लुधियाना में हर दिन कोई न कोई साइबर अपराधियों की जालसाजी का शिकार हो रहा है। ये शातिर लोगों की खून पसीने की कमाई को पलभर में चट कर जाते हैं।
पंजाब में लोगों से साइबर अपराधी लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। पुलिस की तरफ से जागरूक करने के बाद भी लोग ठगों के झांसे में फंस जाते हैं। रिटायर्ड मुलाजिमों के साथ-साथ आम लोगों को पूरी तरह से झांसे में लेकर उनके खातों को खाली कर रहे हैं।
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साइबर ठगों ने लुधियाना के एक रिटायर्ड मुलाजिम सहित एक अन्य शख्स को अपने झांसे में लेकर उनसे लगभग 30 लाख रुपये की ठगी की है। शातिरों ने सरकारी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी को हेल्थ कार्ड बनाने का झांसा देकर 14 लाख 93 हजार रुपये ऐंठ लिए। वहीं, पुराने सिक्के खरीदने के बहाने एक व्यक्ति से 15 लाख रुपये की ठगी कर ली।
पुराने सिक्के खरीदने का झांसा दे ठगे 15 लाख
तीसरे केस में दुगरी के धांधरा रोड़ के रहने वाले तरणजीत सिंह के साथ साइबर ठगी हुई। इसमें तरणजीत सिंह ने बताया है कि उसे करीब डेढ़ महीने पहले एक वाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले वाले ने उससे कहा कि वह पुराने सिक्के खरीदता है। अगर उनके साथ पास है तो वह बेच सकता है। उसके पास कुछ पुराने सिक्के थे, जोकि उसने उसे वाट्सएप पर फोटो खींचकर भेज दिए थे। इसके बाद व्यक्ति का दोबारा कॉल आया और उसने कहा कि इनके उसे 45 लाख रुपये मिलेंगे। उसे सिक्के खरीदने के लिए आरबीआई से परमिशन लेनी पड़ेगी। इसके बाद ठग ने उससे सबसे पहले 750 रुपये बारकोड के जरिये मंगवाए थे। इसके बाद उसने कहा कि अब उसे 12 हजार रुपये और मांगे, जो उसने ट्रांसफर कर दिए थे। इसके बाद फिर आरोपी ने उसे एक सर्टिफिकेट भेज कर 25 हजार रुपये की मांग की। उसने फिर 25 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए थे।
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पुलिस वाले की फोटो लगे नंबर से किया फोन
यह खेल यहीं नहीं रुका इसके बाद आरोपी बार-बार कॉल कर उससे और पैसों की मांग करने लगा, उसने पैसे देने से इन्कार कर दिया तो उसे पुलिस वाले की डीपी लगे नंबर से फोन आया। उसने उसे डरा धमकाकर अन्य बैंक खाते में 15 लाख एक हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। उसने जब आरोपी से पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने कहा कि वह अगर पैसे रिफंड करना चाहता है तो उनके खाते में 48 हजार रुपये और भेज दे, मगर उसे बाद में समझ आ गया था कि उससे धोखाधड़ी हुई है।
डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाने दिया झांसा
पहले मामले में साइबर क्राइम की पुलिस ने दुगरी फल्वार चौक के नजदीक रहने वाले रजिंदरा सिंह की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रजिंदर सिंह ने पुलिस को बताया है कि वह ऑयल एंड गैस नेचुरल कॉरपोरेशन लिमिटेड मुबंई में बतौर जीएम रिटायर्ड हैं। उन्हें कुछ दिनों पहले एक वाट्सएप कॉल आया था। कॉल करने वाला खुद को कुलदीप श्रीवास्तव बताया और कहा कि वह देहरादून तेल भवन ओएनजीसी लिमिटेड रिटायर्ड इंप्लाई सेल से बोल रहा है। वह उनका हेल्थ संबंधी डिजिटल कार्ड बना रहे हैं, इसलिए वह उन्हें एक डिजिटल फार्म भेज रहे हैं। उस फार्म को भरकर दस रुपये साथ में भेज दें।
बैंक में शिकायत देने पर भी नहीं बनी बात
रजिंदर सिंह को लगा कि यह कॉल कंपनी की तरफ से आई होगी। इसलिए उसने फार्म के साथ दस रुपये भेज दिए। बाद में उसे शक हुआ कि कोई फ्रॉड न हो, इसलिए वह तुरंत अपने बैंक पहुंचा, जहां पर उसका और उसकी पत्नी का जॉइंट खाता था। उसके बैंक में कुल 19 लाख 50 हजार रुपये पड़े हुए थे। उसने तुरंत बैंक मैनेजर को सारी बात बताई, जिसके बाद बैंक वालों ने कहा कि वह उसके पैसों की एफडी कर देते हैं। ऐसे में उसके पैसे सुरक्षित रहेंगे। बैंक ने उसके खाते के पैसे एफडी में बदल दिए, लेकिन अगले ही दिन उसके खाते से अलग-अलग एंटि्रयों के जरिये 14 लाख 93 हजार साइबर ठगों ने ट्रांसफर करवा लिए थे। फिर उसने तुरंत पुलिस को शिकायत दी।
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
इस मामले में साइबर सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह ने बताया कि पुलिस लगातार लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक कर रही है। मगर फिर भी लोग साइबर ठगों की बातों में आकर उनके झांसे में आ जाते हैं। उक्त दोनों मामलों में भी पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज आगे की जांच शुरू कर दी है। लोगों से अपील है कि वह साइबर ठगी से बचें।