नकली प्लेटलेट्स मामले में पुलिस की गिरफ्त में आए रिलायंस लाइफ साइंस के मैनेजर जाहीर बोरा ने पुलिस रिमांड के दौरान अहम खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने अदालत की मंजूरी लेने के बाद इस मामले में पकडे़ गए आरोपी लैब टेक्नीशियन दिलबाग सिंह के बैंक लॉकर खोला। पुलिस को लॉकर से 32 लाख 89 हजार रुपये की नगदी बरामद हुई है।
काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस के एआईजी अजय मलूजा ने बताया कि रिलायंस के मैनेजर जाहिर बोरा ने पुलिस रिमांड के दौरान बताया कि आरोपी दिलबाग सिंह का उनकी कंपनी के साथ पांच हजार लीटर प्लेटलेट्स बनाने का सौदा एक करोड़ 25 लाख रुपये में हुआ था। इसमें से आधी रकम आरोपी दिलबाग को दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि उक्त आरोपी ने पंजाब एंड सिंध बैंक भुच्चो मंडी स्थित अपने बैंक खातों में यह रकम डलवाई थी और उसी बैंक में उसके दो लॉकर हैं।
एआईजी ने बताया कि मैनेजर के खुलासे के बाद जब पुलिस ने अदालत से मंजूरी लेकर आरोपी दिलबाग के लॉकरों की जांच की तो वहां से 32 लाख 89 हजार रुपये बरामद हुए। एआईजी ने बताया कि अब तक इस मामले में पुलिस ने 38 लाख 89 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं। साथ ही प्लेटलेट्स भरने वाले 12 लाख के पैकेट भी बरामद किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस रिलांयस से भी दस्तावेज मंगवाकर जांच करेगी। इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार रिमांड के दौरान रिलायंस मैनेजर से पूछताछ कर रही है। इस पूरे मामले में रिलायंस के मैनेजर सहित छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
एआईजी ने बताया कि 26 जून को रिलायंस मैनेजर बोरा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिसके बाद उसे अगले दिन अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने आरोपी मैनेजर को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया था।
यह था मामला
काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस व सेहत विभाग ने सांझा आपरेशन के तहत नकली प्लेटलेट्स की 21 हजार 752 थैलियों से भरे ट्रक समेत पांच आरोपियों को 13 जून को गिरफ्तार किया गया था। इसमें आरोपी लैब टेक्नीशियन दिलबाग सिंह, परमजीत सिंह और ट्रक चालक लाल बहादुर, नरिंदर सिंह और परमजीत सिंह शामिल हैं।