नकली प्लैटलेट्स बनाने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी दिलबाग सिंह, परमजीत सिंह, परमजीत, नरेंद्र सिंह और लाल बहादुर को पुलिस ने मंगलवार को अदालत में पेश किया। उनको 17 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। हालांकि पुलिस ने अदालत से आरोपियों का एक हफ्ते का रिमांड मांगा था।
काउंटर इंटेलिजेंस के एआईजी अजय मलूजा ने बताया कि आरोपियों का पुलिस रिमांड हासिल कर लिया गया है। इस दौरान कई अहम खुलासे हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि सेहत विभाग ने टैंकर में से बरामद नकली प्लैटलेट्स की थैलियों के सैंपल ले लिए हैं। बाकी को अभी टैंकर में ही रखा गया है, जो सील कर स्टार्ट रखा हुआ है।
सोमवार को काउंटर इंटेलिजेंस और सेहत विभाग ने एक सांझे ऑपरेशन के तहत जिले के गांव बीड बहमण के पास बने एक मकान में छापामारी कर टैंकर को जब्त किया था। इसमें से करीब 21 हजार 752 नकली प्लैटलेट्स की थैलियां बरामद की गई। उनकी बाजार में एक करोड़ रुपये से अधिक की कीमत बताई जा रही है।
आरोपियों ने रिलायंस कंपनी के साथ लाखों रुपये का सौदा कर अस्ली प्लैटलेट्स तैयार कर देने थे, लेकिन खून का इंतजाम ने होने के चलते आरोपियों ने सिंथेटिक प्लैटलेट्स को तैैयार करने के लिए 4 हजार लीटर दूध, 500 अंडे, 1 किलो मीठा सोडा, 3 किलो रिफाइंड तेल का उपयोग किया था। सेहत विभाग के अनुसार उक्त तैयार किए गए नकली प्लैटलेट्स की पीएच 7 है, जो कि पूरी तरह तेजाब है।
प्लैटलेट्स को नष्ट करने को अदालत से लेंगे अनुमति : दुग्गल
सेहत विभाग के अधिकारी अमित दुग्गल ने कहा कि पकडे़ गए नकली प्लैटलेट्स को नष्ट करने के लिए अदालत से अनुमति ली जाएगी। उन्होंने बताया कि उक्त प्लैटलेट्स से पैदा होने वाली बदबू से लोग कई भयानक बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार नकली प्लैटलेट्स बनाने के काम में सिर्फ लैब टेक्नीशियन ही नहीं, बल्कि इस मामले में कई बडे़ सफेदपोश भी शामिल हैं। जो लैब टेक्नीशियनों के पकडे़ जाने के बाद भूमिगत हो गए है।