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विवाहिता की मौत पर बठिंडा-मानसा हाईवे जाम

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गांव जंडावाला में पेट्रोल छिड़ककर जलाई गई विवाहिता सुखप्रीत कौर ने डीएमसी लुधियाना में दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतका के परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भाकियू एकता (सिद्धूपुर) और भाकियू (डकौंदा) के साथ मिलकर सिविल अस्पताल के सामने बठिंडा मानसा नेशनल हाईवे जाम कर दिया।
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धरना प्रदर्शन करीब पांच घंटे चलता रहा। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 24 घंटों में आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन देने के बाद धरना हटाया गया। किसान संगठनों और परिजनों ने कहा कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वह मृतका का पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे। डीएमसी से मृतका का शव पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल बठिंडा लाया गया है। सुबह 10 बजे से लगा धरना करीब तीन बजे पुलिस के आश्वासन पर उठाया गया।

मृतका सुखप्रीत कौर के दादा वेदांत सिंह निवासी कोटशमीर ने बताया कि सुखप्रीत की शादी 11 वर्ष पहले सतनाम सिंह निवासी जंडावाला के साथ हुई थी। इस पर उन्होंने 25 लाख रुपये खर्च किए थे। शादी के बाद सुखप्रीत का एक बेटा हुआ। इस दौरान सुखप्रीत कौर का पति सतनाम सिंह बीमार हो गया। उसके उपचार पर भी उन्होंने लाखों रुपये खर्च किए लेकिन सुखप्रीत के पति सतनाम सिंह, ससुर रेशम सिंह, सास मनजीत कौर और ननद संदीप कौर ने उसे मायके से और पैसा लेकर आने के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। 31 मई को इसी बात पर सुखप्रीत कौर और उसके ससुरालियों में झगड़ा हुआ जिसके बाद उसके ससुरालियों ने उसे आग के हवाले कर दिया। उसे सिविल अस्पताल पहुुंचाया गया लेकिन 90 फीसदी जलने के कारण उसे डीएमसी लुधियाना रेफर कर दिया गया। वहां पर आठ दिन बाद सुखप्रीत कौर ने दम तोड़ दिया। सूत्रों के अनुसार थाना नहियांवाला पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
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मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए शुक्रवार को सिविल अस्पताल बठिंडा पहुंचाया गया जहां पर पीड़ित परिवार के समर्थन में भाकियू एकता (सिद्धूपुर) और भाकियू (डकौंदा) ने परिजनों से मिलकर सिविल अस्पताल के सामने धरना देकर चक्का जाम कर दिया। इस अवसर पर किसानों और मृतका के परिजनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर 24 घंटों में आरोपियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना हटाया गया। किसान संगठनों ने कहा कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती तब तक मृतका के शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया जाएगा।
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