फर्जी ट्रेवल एजेंट नीतिश घई गिरफ्तार
आरोपी के खिलाफ पंजाब में हैं 38 मामले हैं दर्ज, अन्य राज्यों से भी हैं शिकायतें
पुलिस ने आरोपी के एक साथी को पटियाला से किया गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। विदेश भेजने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ठगने के आरोपी महानगर के सरगना नीतिश घई को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के साथ साथ उसके एक साथी को भी गिरफ्तार किया है। दोनों को महानगर की पुलिस ने पटियाला से पकड़ा है। पुलिस का दावा है कि नीतिश घई के गिरफ्तार होने से महानगर के अलग अलग थानों में 38 के करीब मामले सुलझने की उम्मीद है। आरोपी ने वी वीजा एट माडल टाउन, जीजीआई ग्रुप ऑल टाइप वीजा कंसल्टेंसी गिल रोड और 99वीजा ए ब्राइट सेल्यूशन के नाम से कंपनियां खोल रखी थीं। दसरे साथी की पहचान रविंदर कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया। जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस क्राइम गगनअजीत सिंह ने बताया कि ट्रेवल एजेंटों द्वारा लगातार ठगी की जा रही थी। सरकार के ध्यान में आने के बाद ठग ट्रेवल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए गए। उन्होंने कहा कि भोलेभाले लोगों को विदेश भेजने के नाम पर नीतिश घई ने भी कई लोगों के साथ ठगी की थी। आरोपी के खिलाफ एक के बाद एक शिकायत आने के बाद पुलिस ने मामले दर्ज किए।
साथियों के नाम ट्रांसफर की थीं कंपनियां
डीसीपी क्राइम गगनअजीत सिंह ने बताया कि गिल रोड और घुमारमंडी में चल रही दो ट्रेवल एजेंसियां भी नितिश घई की थी, लेकिन उसने कागज तजिंदर सिंह और रविंदर कुमार के नाम से बनाए हुए थे। तीनों फर्जी कंपनियों का पैसा नीतिश घई के पास जाता था। आरोपी दोनों को तनख्वाह देता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी विभिन्न अखबारों में इश्तहार देकर भोले भाले लोगों को फंसाता था। आरोपी लोगों से 1500 रुपये फाइल चार्ज, 3500 रुपये प्री मेडिकल, फाइल एंबेसी में लगवाने के 25 हजार और वीजा लगने पर चार लाख की बात कर एक लाख रुपये नकद हासिल कर लेता था। विदेश में परमिट वीजा दिलाने के नाम पर ठगी मारने के बाद आरोपी झांसा देता था कि वहां उन्हें एक लाख 40 हजार रुपये सैलरी मिलेगी। जिसके बाद वह बीस हजार रुपये महीना हासिल करता था।
चंडीगढ़ की लैब सहित तीन में होता था फर्जी मेडिकल
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने लोगों का मेडिकल कराने के लिए तीन डाइग्नोस्टिक सेंटर भी ढूंढ रखे थे। फाइल हाथ में आने के बाद आरोपी बस स्टैंड के पास स्थित चौधरी डाइग्नोस्टिक सेंटर, समराला चौक के पास स्थित कबाड़ी मार्केट की फास्ट डाइग्नोस्टिक और चंडीगढ़ स्थित सेक्टर 44 की दिल्ली डाइग्नोस्टिक सेंटर पर उन्हें भेज देते थे। वहां पर लोगों से सैंपल लेने के बाद मेडिकल लैब वाले संबंधित ट्रेवल एजेंसी को फोन पर बता देते थे और जाली रिपोर्ट तैयार हो जाती थी। पुलिस के मुताबिक लैब मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
ठगी की कमाई से नीतिश घई ने खरीदी थी संपति
डीसीपी क्राइम गगनअजीत सिंह ने बताया कि नीतिश घई ने अपनी काली कमाई से महानगर के कई इलाकों में संपति खरीदी और कई तरह की कारें खरीदी हुई थी। आरोपी को प्रति महीने 70 से 75 लाख रुपये की आमदन थी। आरोपी अपने पास रखे स्टाफ, दफ्तर और बिजली खर्च पर प्रति माह सात से आठ लाख रुपये का खर्च करता था। उसने विभिन्न अखबारों में इस्तेहार देने के लिए साठ से 70 लाख रुपये का सलाना बजट भी रखा हुआ था। पुलिस के मुताबिक आरोपी त्यौहारों के दिनों में ज्यादा इस्तेहार देते थे ताकि लोग उनके पास आ सके। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के दो साथी पहले ही गिरफ्तार हो चुके है, जबकि नितिश की पत्नी को पुलिस ने जांच में शामिल किया हुआ है। इसके अलावा आरोपी नीतिश का भाई मनीश कुमार अभी फरार है।
--विकास मल्होत्रा, 7 जुलाई