चिट्टे के चपेट में नाबालिग और महिलाओं भी
15 नाबालिग और बीस से 25 महिलाओं का भी चल रहा है इलाज
तीन नाबालिग एचआईवी पॉजिटिव
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। चिट्टे के टीके ने जहां राज्य के नौजवानों की जवानी को निगला हुआ है, वहीं चिट्टे के नशे ने अब नाबालिग और महिलाओं को भी डंक मारना शुरू कर दिया है। चिट्टे के टीके लगाने वाले युवाओं की संख्या जहां लगातार बढ़ रही है। अब पंजाब में नाबालिग और महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। शहर के नशा छुड़ाओ केंद्रों में लगातार नशे के टीके लगाने वाले नाबालिग और महिलाएं अपना इलाज कराने के लिए आ रही हैं। सिविल अस्पताल के ओएसटी सेंटर में करीब 20-25 महिलाए और 15 नाबालिग अपना इलाज करवा रहे हैं। यह मरीज ऐसे हैं जो मेडिकल नशे के टीके लगाते हैं। चिंता का विषय है कि अस्पताल में इलाज कराने वाले तीन नाबालिग ऐसे हैं जो अब तक टीके की सुई से एचआईवी पीड़ित हो चुके हैं। महिलाएं भी हैपेटाइटेस सी की मरीज बन चुकी हैं। इनकी संख्या में बढ़ावा पिछले तीन चार सालों से हो रहा है।
ओएसटी सेंटर में 15 से 16 वर्षों की उम्र के कई लड़के हैं जो पिछले चार पांच वर्षों से नशा कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे हैं जिन्हें उनके बड़े भाइयों या घर के अन्य लोगों को देख कर चिट्टे के टीके लगाने की लत लगी है। कुछ तो इनमें से एसे हैं जो किसी जगह काम करते हैं और वहां के मालिक से उसे नशा करने की लत लगी है। ओएसटी सेंटर के इंचार्ज डॉ. एसएस धीर का कहना है कि यह ज्यादातर वो नाबालिग हैं जो किसी तरीके का काम करते हैं और फिर कोई अपने पिता और भाई के साथ काम में मदद करते हैं। इनमें से तो कुछ ऐसे हैं जो पहले चिट्टे का टीका लगाते थे और फिर अपने दोस्तों की जुंडली में मेडिकल नशे का टीका लगाने लगे। तीन चार नाबालिग को तो एड्स की बीमारी हो चुकी है। जिनका इलाज चल रहा है। ओएसटी सेंटर में इलाज कराने आने वाले नाबालिग की नशे के दलदल में फंसने की कहानी भी अपनी अपनी है। एक नाबालिग ने बताया कि वह चाय की दुकान पर काम करता था। जहां रोज शाम को चाए पीने के लिए कुछ नौजवान आते थे। वह आकर चिट्टे का टीका लगाते थे। वह उन्हें जब भी चाय देने के लिए जाता तो वह उसे कहते थे कि टीका लगाकर देख फिर कुछ दिन बाद वह उनके पास से टीका लेकर लगाने लगा। फिर उसे ऐसी लत लगी कि बाहर नहीं आ सका। आखिर उसकी इस आदत के बारे उसके परिजनों को पता लगा तो उसका इलाज शुरू हुआ।
नशा करते देखा तो लगाने लगा टीका
एक नाबालिग का कहना है कि लुधियाना के एक गांव में उसकी अपने से ज्यादा उम्र के नौजवानों के साथ दोस्ती हो गई। जब वह उनके पास जाता तो उन्हें नशा करते हुए देखता था। फिर धीरे धीरे वह भी उनके साथ टीके लगाने लगा। ओएसटी सेंटर के इंचार्ज का कहना है कि सेंटर में उन महिलाओं की संख्या ज्यादा है जिनके पति या अन्य साथी नशा करने के आदी हैं। उन्होंने बताया कि आरकेस्ट्रा ग्रुप में काम करने वाली लड़कियां भी काफी टीके लगाती हैं, जिनका इलाज चल रहा है।