बिना उपकरणों के लड़ते फायर कर्मियों ने दी जान
गीली बोरिया डाल खुद को बचाने और आग बुझाने में लगे रहे फायर कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
महानगर का फायर सिस्टम आधुनिक उपकरणों से लैस न होने के बावजूद फायर कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालते है। इसका खामियाजा फायर कर्मचारियों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। सोमवार को इडस्ट्री एरिया में लगी आग को बुझाने के दौरान गिरी बिल्डिंग में तीन अफसरों सहित करीब दस फायर कर्मचारियों के दबे होने की आशंका है। देर शाम तक चले राहत अप्रेशन में दो फायर कर्मचारियों के शव ही बाहर निकाले जा सके। जिनमें सीनियर फायर अफसर सेमुअल गिल और फायर कर्मचारी पूर्ण सिंह शामिल है। फायर जि मेदारी निभाने के साथ साथ अपने साथियों की सलामती की दुआएं भी मांग रहे है, लेकिन जैसे जैसे समय बीत रहा है चमत्कार ही दबे लोगों को बचा सकता है।
काबिलेजिक्र है कि आग पर काबू पाने के लिए फायर कर्मियों को फायर से टी सूट, जूते, मास्क, पाइपे, सीढ़ी सहित कई तरह के आधुनिक यंत्रों की जरत रहती है, लेकिन फायर कर्मियों के पास अधिकतर ऐसे आधुनिक उपकरण मौजूद नहीं है। तमाम इनकी गैरमौजूदगी के बावजूद फायर कर्मी अपनी जान पर खेल कर आग बुझाने में लगे रहते है। सोमवार को भी आग बुझाने के दौरान शरीर को नुकसान से बचाने के लिए पानी ेमें भीगी बोरिया बांध कर अपनी जि मेदारी को निभाते रहे। फायर कर्मियों के सिर पर पहने हैल्मेट पूरी तरह से आग के सेक के कारण तप रहे थे, लेकिन वह फिर भी आग की लपटों के साथ लड़ते रहे।
पिता के दबे होने के बावजूद अपनी ड्यूटी निभाता रहा फायर कर्मचारी बेटा
प्लास्टिक फैक्टरी में आग लगने के दौरान हुए धमाके के बाद गिरी बिल्डिंग के नीचे फायर कर्मचारियों के साथ सीनियर फायर अफसर राज कुमार नीचे दब गए। उनका बेटा सन्नी भी फायर विभाग में कर्मचारी है। पिता के नीचे दबे होने की सूचना के बाद एक बार तो सन्नी पूरी तरह से घबरा गया। वह अपने पिता को ढूंढने में लग गया, लेकिन कुछ समय बाद उसने खुद को संभाला और अपनी ड्यूटी को निभाने में लग गया। पिता के मलबे में दबे होने के बावजूद भी उनका बेटा पूरे दिल से अपनी ड्यूटी को निभाता रहा। इसके अलावा बाकी फायर कर्मचारियों के परिवार वाले भी वहां पहुंच गए।
कुछ दिन पहले घायल हुए फायर कर्मचारी भी है नीचे दबे
सूफिया चौक में कुछ दिन पहले लगी आग में ब्लास्ट होने के दौरान तीन फायर कर्मचारी घायल हो गए थे। वह फायर कर्मचारी कुछ दिन अस्पताल में रहने के बाद ठीक हुए और करीब एक महीना पहले ही उन्होने दोबारा से ड्यूटी ज्वाइन की। सोमवार को प्लास्टिक फैक्टरी में लगी आग के दौरान भी वह फायर कर्मचारी काम कर रहे थे और आग बुझाने में लगे हुए थे। वह भी धमाका होने के बाद बिल्डिंग के नीचे दबे हुए है। उसके अलावा अन्य फायर कर्मचारियों के परिजन भी वहां पहुंचे, लेकिन कुछ न पता लगने के कारण वह सिविल अस्पताल पहुंच गए।ऱ् फायर कर्मचारियों के बूढ़े मां बाप का कहना था कि उन्हें उनके बच्चों के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है।
दिन ढलने के साथ प्रशासन की धड़कने भी बढ़ी
सोमवार की सुबह फैक्टरी में आग लगी और करीब 12 बजे फैक्टरी में धमाका होकर बिल्डिंग नीचे गिर गई। घटना के कुछ समय बाद एनडीआरएफ और अन्य बचाव कार्य की टीमें वहां पहुंच गई। बिल्डिंग नीचे गिरने के कारण वहां मल्बा काफी हो गया था और दिन ढलने के साथ साथ प्रशासन की सांसे भी फूलने लगी। प्रशासन की तरफ से लाइट का इंतजाम तो कर दिया गया, लेकिन अंधेरे में काम की स्पीड कम हो जाएगी जिस कारण प्रशासन को दिक्कत थी।
पाइप ठीक करने के चक्कर में गई इंद्रपाल की जान
आग पर नियंत्रण होने के दौरान फैक्टरी मालिक के बचपन के दोस्त इंद्रपाल सिंह फैक्टरी में पहुंचे। वह फैक्टरी मालिक के साथ अंदर गए। मौका देखने के बाद फैक्टरी मालिक के साथ इंद्रपाल सिंह बाहर आ रहे थे कि अचानक इंद्रपाल सिंह रुक गए। फैक्टरी मालिक ने उन्हें कहा कि वह बाहर आ जाए। इंद्रपाल सिंह ने उन्हें कहा कि वह पाइप ठीक कर बाहर आ रहा है। इसी दौरान बिल्डिंग नीचे गिर गई और इंद्रपाल सिंह नीचे दब गए। जब प्रशासन ने मल्बा पीछे करने का कार्य शुरु किया तो सबसे पहले शव भी इंद्रपाल सिंह का ही बाहर निकला।
बाल बाल बचे एसीपी, भावाधस नेता को भी ले गए थे बाहर
इंडस्ट्री एरिया में प्लास्टिक फैक्टरी में आग लगने की सूचना मिलने के बाद एसीपी सेंट्रल मंदीप सिंह मौके पर पहुंच गए। वह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। वह फैक्टरी के बाहर खड़े थे। इसी दौरान भावाधस नेता लक्ष्मण द्रविड़ भी वहां पहुंच गए। वह अंदर गए तो एसीपी मंदीप सिंह उन्हें बाहर ले आए। कुछ समय बाद बाहर रुकने के बाद भावाधस नेता फिर से अंदर चले गए। एसीपी मंदीप दोबारा से उन्हें बाहर ले आए। दोबारा बाहर आने के बाद एसीपी मंदीप सिंह दूसरी तरफ आग देखने के लिए चले गए तो पीछे से लक्ष्मण द्रविड़ फिर से अंदर चले गए और फैक्टरी नीचे गिर गई।
फैक्टरी मालिक के मौके पर न होने के कारण भी रही दिक्कत
हादसा होने के कुछ समय बाद फैक्टरी मालिक की तबीयत खराब हो गई और परिवार वाले उन्हें संभालने के चक्कर में वहां से चले गए। फैक्टरी मालिक के मौके पर न होने के कारण प्रशासन को काफी दिक्कत आई, क्योंकि फैक्टरी में कहां क्या बना हुआ है प्रशासन के किसी भी व्यक्ति को कुछ पता नहीं है। फायर कर्मचारी कहां काम कर रहे थे और फैक्टरी के कितने लोग अंदर है किसी को कुछ पता नहीं है। प्रशासन फैक्टरी मालिकों का पता लगानेव् में लगे हुए थे ताकि पता लगाया जा सके कि फैक्टरी में कहां क्या बना हुआ है।
राजीव शर्मा, विकास मल्होत्रा 20 नवंबर