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-खुद को पुलिस वाले बता डेरे के अंदर घुसे हथियारबंद नकाबपोश लुटेरे-

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डेरे के सेवादारों को बंधक बनाकर 1.50 लाख लूटे
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लुधियाना। किला रायपुरा स्थित एक डेरे में खुद को पुलिस वाला बता कर सात हथियारबंद नकाबपोश लुटेरे घुस गए। लुटेरों ने डेरे के अंदर सो रहे सभी सेवादारों को बंधक बना लिया। बंधक बनाने के बाद लुटेरों ने सभी के मोबाइल छीन लिए। इसके बाद डेरा मुखी के कमरे की अलमारी में पड़े 1.50 लाख रुपये लूट लिए। मुख्य सेवादार ने इसका विरोध जताया तो लुटेरों ने मारपीट की। इसके बाद सभी सेवादारों को कमरे के अंदर बंद कर बाहर से कुंडी लगाकर लुटेरे भाग गए। मुख्य सेवादार ने खुद को बंधक मुक्त करवाकर गांव के सरपंच को कॉल किया। इसके बाद सूचना पुलिस को दी गई। थाना सदर की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सात अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुख्य सेवादार श्यामपुरी ने बताया कि गांव किला रायपुर में राम जी महाराज का डेरा है, जहां मुख्य गद्दीनशीन सुरजपुरी हैं। श्याम पुरी का कहना है कि रविवार मध्यरात्रि करीब 2 बजे वह डेरे पर ही था। डेरे पर उसके अलावा छह और लोग भी रहते है। रविवार सभी सो रहे थे। करीब 2 बजे सात हथियारबंद नकाबपोश लोग अंदर आ गए। पहले लुटेरों ने बाहर के कमरों में सो रहे सेवादारों को बंधक बना लिया। फिर उनके कमरे में आए। कमरे में वह और महाराज जी थे। लुटेरे अंदर आए और कहने लगे की वह पुलिस वाले है, उनके साथ गांव का सरपंच और नंबरदार है। उन्हें पता चला है कि डेरे में नशा बिकता है, इसलिए डेरे की तलाशी लेनी है।
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इसके बाद लुटेरों ने सभी के मोबाइल छीन लिए। जब उसका मोबाइल मांगा तो उसने कहा कि वह मोबाइल नहीं रखता। इसके बाद लुटेरों ने अंदर बनी लकड़ी की अलमारी का लॉक तोड़ दिया और अंदर पड़ी 1.50 लाख की नकदी लूट ली। श्यामपुरी का कहना है कि जब उसने लुटेरों को नकदी ले जाने से रोका तो लुटेरों ने उस पर हमला कर दिया। लुटेरों ने जाते समय उसे और बाकी सेवादारों को कमरे में बंद कर दिया और धमकाते हुए फरार हो गए। श्यामपुरी ने बताया कि उनके डेरे में हर साल भंडारा होता है। इस बार भी 7 जून को डेरे में भंडारा था। उन्होने गांव के लोगों से चंदा इकट्ठा कर डेढ़ लाख रुपये जुटाए थे, जोकि लुटेरे ले गए। जांच अधिकारी एएसआई परमजीत सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है। लुटेरों की तलाश की जा रही है।
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थाने से 20 किमी दूर गांव, पुलिस को पहुंचने में लगे एक घंटा
वारदात की सूचना के बाद पुलिस गांव किला रायपुर एक घंटे बाद पहुंची। थाना सदर से किला रायपुर करीब 20 किलोमीटर दूर है। पहले गांव किला रायपुरा थाना डेहलों के अधीन आता था, जोकि गांव से सिर्फ तीन से चार किलोमीटर है। नई हदबंदी आने के बाद गांव किला रायपुर थाना सदर के अधीन आ गया, जोकि गांव से करीब 20 किलोमिटर दूर है। किसी भी पीड़ित को थाने पहुंचने में एक से डेढ़ घंटे लगा जाते है। पुलिस को भी गांव पहुंचने के लिए एक घंटा लग जाता है। गांव के सरपंच ज्ञान सिंह का कहना है कि उन्होने पहले पुलिस कमिश्नर से मांग की थी कि उनका गांव थाना डेहलों के अधीन किया जाए। लेकिन, पुलिस कमिश्नर ने कहा ऐसे मुनासिब नहीं है। इसके बाद उन्होने विकल्प ढूंढते हुए कहा था कि गांव में पुलिस चौकी खोली जाएगी। अभी तक पुलिस को चौकी के लिए गांव में जगह नहीं मिली है।
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