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1984 की झूठी कहानी पर शिकंजा: अमेरिका में फर्जी राजनीतिक शरण लेने वालों की मुश्किलें बढ़ेंगी, होगी जांच

Thu, 03 Sep 2026 10:20 AM IST
Nivedita कंवरपाल, संवाद, हलवारा

सार

अमेरिकी रिकॉर्ड के अनुसार, 1990 के दशक में भारतीयों, विशेषकर सिखों के राजनीतिक शरण आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार, सिखों के राजनीतिक शरण आवेदन 1990 में 34 से बढ़कर 1996 में 10,010 तक पहुंच गए थे। 
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अमेरिका में बढ़ेगी सख्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका में 1984 के दंगों और पंजाब के आतंकवाद के दौर में उत्पीड़न की कथित कहानियां गढ़कर राजनीतिक शरण लेने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 

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ट्रंप प्रशासन ने शरण मामलों में फर्जीवाड़े की जांच तेज करने के संकेत दिए हैं। जांच में आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज, हलफनामे, पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और कथित राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े सबूत फिर खंगाले जा सकते हैं। फर्जी दावा साबित होने पर कार्रवाई केवल आवेदक तक सीमित नहीं रहने की आशंका है। 

कहानी तैयार करने वाले वकील और प्रतिनिधि भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। 

पंजाब के पुराने दावों पर क्यों नजर
1980 और 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद और हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देशों में शरण मांगी थी। इनमें वास्तविक उत्पीड़न झेलने वाले लोग भी थे।
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साथ ही ऐसे मामलों के आरोप भी सामने आते रहे जिनमें शरण हासिल करने के लिए घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने या दस्तावेजों में हेरफेर की बात कही गई। अमेरिकी रिकॉर्ड के अनुसार 1990 के दशक में भारतीयों और खासकर सिखों के राजनीतिक शरण आवेदनों में तेजी आई थी। 

एक अमेरिकी अध्ययन में सिखों के राजनीतिक शरण आवेदन 1990 में 34 से बढ़कर 1996 में 10,010 तक पहुंचने का उल्लेख है। 1997 में भारत से 14 हजार से अधिक राजनीतिक शरण आवेदन दर्ज होने और पहली बार स्वीकृति दर करीब 40 प्रतिशत रहने की बात भी सामने आई थी।  

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वकीलों पर कार्रवाई के पूर्व उदाहरण
अमेरिका में फर्जी शरण दावों के संबंध में वकीलों के खिलाफ कार्रवाई पहले भी हो चुकी है। जनवरी 2023 में न्यूयॉर्क की एक इमिग्रेशन फर्म से जुड़े दो वकीलों और एक सहयोगी ने फर्जी शरण आवेदन और हलफनामे तैयार करने तथा आवेदकों को झूठ बोलने की तैयारी कराने के आरोप स्वीकार किए थे। मई 2023 में दोनों वकीलों को सजा भी सुनाई गई थी।
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